उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है और इस बार मुस्लिम वोट बैंक को लेकर घमासान तेज होने वाला है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में सक्रियता ने न केवल विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि ओवैसी की पार्टी इस बार करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। अब सवाल यह नहीं है कि वे कितनी सीटें जीतेंगे, बल्कि डर इस बात का है कि उनके मैदान में उतरने से किसका बना-बनाया खेल बिगड़ेगा और किसके समीकरण ध्वस्त होंगे।
कांग्रेस और सपा की बढ़ी धड़कनें, खरगे ने दी चेतावनी
ओवैसी की एंट्री से सबसे ज्यादा बेचैनी कांग्रेस खेमे में देखी जा रही है। पार्टी को डर है कि अगर मुस्लिम वोटों का बिखराव हुआ, तो उनका पहले से कमजोर जनाधार पूरी तरह बिखर जाएगा। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यूपी में ओवैसी की संभावित सक्रियता पर चिंता जाहिर करते हुए अपने नेताओं से स्पष्ट कहा था कि “उन्हें आने मत दो, वरना वो खुद भी खत्म होंगे और हमें भी खत्म कर देंगे।” दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी (सपा) अपने पिछले प्रदर्शन और 2024 के लोकसभा नतीजों को लेकर आश्वस्त है। सपा का मानना है कि 2022 में उन्हें लगभग 83 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले थे। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ओवैसी पर तंज कसते हुए कहा था कि ओवैसी यूपी आएंगे तो साइकिल पर बैठकर आएंगे। सपा की रणनीति है कि मुस्लिम वोटों को बंटने से रोका जाए।
क्या मायावती के साथ जाएंगे ओवैसी? बीजेपी के लिए नई मुसीबत
सियासी पंडितों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात बसपा और एआईएमआईएम के बीच गठबंधन की अटकलें हैं। एआईएमआईएम की यूपी इकाई के अध्यक्ष शौकत अली ने संकेत दिया है कि मायावती की बसपा के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि यह समीकरण बनता है, तो सपा और कांग्रेस को बड़ा झटका लगेगा। वहीं, बीजेपी के लिए भी राह आसान नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक विजय उपाध्याय का मानना है कि अगर मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर, जहां 30-40 फीसदी हिंदू आबादी है, ओवैसी ने हिंदू प्रत्याशी उतार दिए तो बीजेपी का गणित गड़बड़ा सकता है।
‘कब्र में जाने से पहले अफसोस नहीं करना चाहता’- ओवैसी की नई रणनीति
भले ही पिछले चुनावों में एआईएमआईएम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा हो और 2022 में 94 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई हो, लेकिन ओवैसी के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव लड़ने को लेकर साफ कहा है कि लोग पूछ रहे हैं कि वे कितनी सीटों पर लड़ेंगे, लेकिन वे “कब्र में जाने से पहले यह अफसोस नहीं रखना चाहते कि उन्होंने लड़ाई लड़ी ही नहीं।” उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या बाकी दल खुद लड़कर बीजेपी को रोक पाए हैं? 2027 के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति बदलते हुए बूथ लेवल मैनेजमेंट पर जोर देना शुरू कर दिया है। हर ग्राम पंचायत में अध्यक्ष और 121 सदस्यों की कमेटियां बनाकर पार्टी जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।