यूपी में चल रहा फॉर्म 7 का खौफनाक खेल, अखिलेश यादव ने बताया कैसे गायब हो रहे आपके वोट

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चल रही चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मंशा पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि राज्य में एक सुनियोजित साजिश के तहत विपक्ष को कमजोर करने के लिए ‘फॉर्म 7’ का दुरुपयोग किया जा रहा है और फर्जी हस्ताक्षर करके मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। अखिलेश यादव के मुताबिक, यह सब हार के डर से किया जा रहा है और बीजेपी की एक गुप्त बैठक में यह रणनीति तय की गई थी कि हर विधानसभा क्षेत्र में विरोधी वोटरों को निशाना बनाया जाए। उन्होंने सकलडीहा और बाबागंज विधानसभा का उदाहरण देते हुए बताया कि बाबागंज के बूथ नंबर 365 पर फर्जी दस्तखत के जरिए करीब 100 वोट कटवा दिए गए, यहां तक कि उनकी पार्टी के एक बीएलए (BLA) का वोट भी गायब कर दिया गया।

वोट कटने के इस खेल में आम जनता ही नहीं, बल्कि खास रसूखदार लोग भी शिकार हो रहे हैं। सपा अध्यक्ष ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि औरैया के नगर अध्यक्ष और बलिया के सिकंदरपुर से सपा विधायक की पत्नी तक का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमारे ही वोटर से नगर अध्यक्ष का काम कटवा दिया गया।” अयोध्या के आंकड़ों को पेश करते हुए अखिलेश ने दावा किया कि वहां एक बूथ पर 181 नोटिस जारी किए गए, जिनमें से 76 प्रतिशत नोटिस पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के लोगों को मिले हैं। उनके अनुसार, जहां सपा ने केवल 47 फॉर्म भरे, वहीं बीजेपी ने एक हजार और अज्ञात लोगों के नाम पर एक लाख से ज्यादा फॉर्म भरकर विपक्ष के वोट काटने की कोशिश की गई है।

इस दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निजी और सियासी हमला भी बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मुख्यमंत्री बिष्ट जी न जाने क्या-क्या बता रहे थे।” उन्होंने आगे एक बहुत ही तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “गद्दी विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं।” अखिलेश ने यह भी कहा कि कुछ लोग “बाबा का नाम लेना चाहते हैं, लेकिन जुबान से बाबर निकल जाता है।” इटावा में एक सपा समर्थक प्रधान के साथ हुई मारपीट की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई वोटर अपना नाम बचाने के लिए आवाज उठाता है, तो उसे डराया-धमकाया जा रहा है। अखिलेश का कहना है कि बीजेपी अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि फॉर्म 7 के जरिए नाम काटे जा रहे हैं, जबकि आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं।

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