क्यों ट्रेंड कर रहा ‘जॉर्ज सोरोस अटैक्स इंडिया’? अडानी पर नए खुलासे के पीछे है यह शख्स

हले हिंडनबर्ग रिसर्च और अब ‘ऑर्गेनाइजड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ यानी OCCRP ने अडानी समूह को निशाने पर लिया है। OCCRP की ताजा रिपोर्ट का असर यह हुआ कि अडानी समूह की कंपनी के शेयरों में बृहस्पतिवार को गिरावट देखी गई।

दरअसल ओसीसीआरपी ने अडानी समूह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके प्रवर्तक परिवार के साझेदारों से जुड़ी विदेशी इकाइयों के जरिए अडानी समूह के शेयरों में करोड़ों डॉलर का निवेश किया गया। अडाणी समूह ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

अरबपति जॉर्ज सोरोस का नाम उछला

सात महीने में यह दूसरी बार है कि अडानी समूह पर व्यावसायिक लाभ के लिए संदिग्ध तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लग रहा है। इन दोनों बार अरबपति जॉर्ज सोरोस का नाम उछला है। जॉर्ज सोरोस इस समय एक्स (ट्विटर) पर ट्रेंड कर रहा है। एक्स पर #SorosAttacksIndia ट्रेंड कर रहा है। ये पहली बार नहीं है जब जॉर्ज सोरोस पर भारत विरोध में शामिल होने का आरोप लगा है।

जॉर्ज सोरोस एक यहूदी हैं जो नाजी नरसंहार के दौरान बच गए थे। उस दौरान 5 लाख यहूदी हंगेरियन मारे गए थे। जॉर्ज सोरोस के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वे और उनकी ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ‘तानाशाही सत्ता’ को खत्म करने में लगे रहते हैं। सोरोस के आलोचक उनको अराजकता का एजेंट मानते हैं। 1930 में जन्मे जॉर्ज सोरोस को एक संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद संघर्ष करना पड़ा। सोरोस ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए रेलवे कुली और वेटर के रूप में काम किया था।

फिर से चर्चा में क्यों सोरोस?

जिस OCCRP ने अपनी रिपोर्ट में अडानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं उसका संबंध सोरोस से है। OCCRP के अनुसार, यह खोजी पत्रकारों का एक वैश्विक नेटवर्क है जो “अपराध और भ्रष्टाचार को उजागर करता है ताकि सत्ता जनता के प्रति जवाबदेह हो सके”। जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन इसके दानदाताओं में से एक है। पत्रकारों के एक ग्रुप द्वारा संचालित OCCRP का मुख्यालय अमेरिका में है और इस कंपनी की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। OCCRP के मुताबिक यह पब्लिक फंडेड फर्म है, लेकिन इसमें अरबपति जॉर्ज सोरेस की कंपनी भी आर्थिक मदद करती है।

कई ‘टैक्स हेवन’ की फाइलों और अडानी समूह के कई आंतरिक ईमेल की समीक्षा का हवाला देते हुए ओसीसीआरपी ने कहा है कि उसकी जांच में कम से कम दो मामले पाए गए जहां ‘‘अस्पष्ट’’ निवेशकों ने ऐसी विदेशी इकाइयों के जरिए अडाणी के शेयर खरीदे व बेचे। ‘टैक्स हेवन’ उन देशों को कहते हैं जहां अन्य देशों की अपेक्षा बहुत कम कर लगता है।

एक्स पर कर रहा ट्रेंड

सोरोस अटैक्स इंडिया भारत में नंबर वन ट्रेंड कर रहा था। #SorosAttacksIndia का इस्तेमाल कर लोग अडानी पर OCCRP के नए खुलासे की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “वे कहते हैं, समय ही सब कुछ है। जैसे ही सूरज उगता है, वैसे ही अडानी की सफलता पर ग्रहण लगाने का एक और प्रयास शुरू हो जाता है। लेकिन हम इन सोची-समझी चालों से मूर्ख नहीं बनेंगे। आइए मजबूती से खड़े रहें और कल्पना से सच्चाई को अलग करें।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “अडानी की ग्रोथ स्टोरी में आया ट्विस्ट, लेकिन यह ट्विस्ट किसी एक्सटर्नल फोर्स का प्लांड अटैक लगता है।”

ओसीसीआरपी ने दावा किया है कि नासिर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग नामक दो लोगों के अडाणी परिवार के साथ लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं और उन्होंने गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी से जुड़ी समूह कंपनियों आदि में निदेशक तथा शेयरधारक के रूप में भी काम किया है। ओसीसीआरपी ने आरोप लगाया, ‘‘ इन लोगों ने विदेशी इकाइयों के जरिए कई वर्षों तक अडाणी के शेयर खरीदे व बेचे और इससे काफी मुनाफा कमाया। उनकी भागीदारी अस्पष्ट है।’’

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