Muzaffarnagar में कांग्रेस की 21 दिवसीय ‘किसान नौजवान बचाओ यात्रा’ को लेकर शनिवार (2 मई) देर शाम सियासी माहौल अचानक गरमा गया। यह यात्रा सहारनपुर से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, दिल्ली होते हुए लखनऊ तक प्रस्तावित थी। जैसे ही यात्रा कंपनी बाग पहुंची, वहां प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप से विवाद खड़ा हो गया।
बिना अनुमति का हवाला देकर रोकी गई यात्रा
जिला प्रशासन ने बिना अनुमति यात्रा निकाले जाने का हवाला देते हुए इसे आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने पहले से ही भारी संख्या में बल तैनात कर रखा था और यात्रा को चारों ओर से घेर लिया गया। इस कार्रवाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
पुलिस और कार्यकर्ताओं में धक्का-मुक्की
यात्रा रोके जाने के बाद पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई। हालात को काबू में करने के लिए तीन थानों की पुलिस टीम को मौके पर तैनात किया गया। विरोध स्वरूप कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया।
कांग्रेस का आरोप- लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण यात्रा को जबरन रोककर लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। उनका कहना है कि यह कदम राजनीतिक दबाव में उठाया गया है और सरकार विरोधी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन का पक्ष- नियमों के तहत कार्रवाई
वहीं, पुलिस और जिला प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रैली या यात्रा निकालना नियमों के खिलाफ है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी।
घटना के दौरान कंपनी बाग और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। देर रात तक इलाके में तनाव बना रहा, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है।