
भारत का चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह के बेहद करीब पहुंच चुका है। ‘चंद्रयान-3’ का प्रक्षेपण 14 जुलाई को किया गया था और पांच अगस्त को इसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था।
बुधवार को कक्षा घटाए जाने की एक और सफल प्रक्रिया से गुजरने के साथ ही यह चांद की सतह के और नजदीक आ गया। भारत के अलावा रूस ने भी अपना मून मिशन लॉन्च किया है।
दरअसल चंद्रयान-3 के उड़ान भरने के एक महीने से भी कम समय के बाद, रूस ने शुक्रवार को दक्षिणी ध्रुव पर उतारने के लिए अपना मून मिशन लॉन्च किया। रूस ने 47 साल बाद यह कदम उठाया है। लेकिन भारत और रूस अकेले नहीं हैं, अब इस दौड़ में एक बार फिर से दुनिया के कई देश जुड़ गए हैं। नासा ने भी चंद्रमा पर फिर से जाने के वास्ते अपने आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए टीम को अंतिम रूप दे दिया है।
भारत, रूस और अमेरिका के अलावा, जापान भी इस रेस में शामिल होने वाला है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग के केवल तीन दिन बाद, 26 अगस्त को जापान अपने SLIM लैंडर के प्रक्षेपण के लिए तैयारी कर रहा है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में चांद को एक्सप्लोर करने वाले कई मिशन लॉन्च किए जाने की संभावना है। केवल तीन देश चंद्रमा पर सफलतापूर्व उतरने में सफल रहे हैं: पूर्व सोवियत संघ, अमेरिका और चीन। आइए एक नजर डालते हैं आगामी मून मिशनों पर।
1. SLIM – जाक्सा (जापान) लूनर लैंडर (लॉन्च: 26 अगस्त, 2023):
स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून (SLIM) का लक्ष्य एक छोटे एक्सप्लोरर द्वारा सटीक लैंडिंग तकनीकों का प्रदर्शन करना, हल्के एक्सप्लोरेशन सिस्टम के माध्यम से चंद्रमा और ग्रह के अध्ययन में तेजी लाना है। SLIM को जापान के तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से H2A बूस्टर पर XRISM मिशन के साथ “राइड-शेयर” पेलोड के रूप में लॉन्च करने की योजना है, जो वर्तमान में 26 अगस्त को 00:34:57 UTC (6:04 am7 IST) पर शेड्यूल है।
2. पेरेग्रीन मिशन 1 – NASA CLPS लूनर लैंडर (लॉन्च: 2023):
साइनस विस्कोसिटैटिस को छूने के उद्देश्य से, पेरेग्रीन मिशन 1 चंद्र बाह्यमंडल, थर्मल प्रॉपर्टीज, हाइड्रोजन एबुडेंस, मैग्नेटिक फील्ड, रेडिएशन एनवायरनमेंट सहित काफी कुछ का अध्ययन करना चाहता है। वल्कन सेंटौर लॉन्च व्हीकल के परीक्षणों में पाई गई विसंगतियों के कारण पेरेग्रीन मिशन 1 का प्रक्षेपण अब अपनी नियोजित 4 मई की तारीख से आगे बढ़ गया है लेकिन यह इसी साल लॉन्च होने वाला है।
3. IM-1 – नासा सीएलपीएस लूनर लैंडर (लॉन्च: 2023):
इंट्यूएटिव मशीन्स 1 (आईएम-1) ने नोवा-सी लैंडर को मालापर्ट ए क्रेटर के रिम पर रखने की योजना बनाई है। मिशन के उद्देश्यों में प्लम-सरफेस इंटरैक्शन, रेडियो एस्ट्रोनॉमी, अंतरिक्ष मौसम इंटरैक्शन का अध्ययन करना और सटीक लैंडिंग और संचार प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना शामिल है।
4. लूनर ट्रेलब्लेजर – नासा लूनर ऑर्बिटिंग स्मॉल सैटेलाइट (लॉन्च: 2023):
लूनर ट्रेलब्लेजर का मिशन चंद्रमा की परिक्रमा करना, चंद्रमा पर जल वितरण और भूविज्ञान से इसके संबंध का अध्ययन करना है। PRIME-1 CLPS मिशन पर NASA की SIMPLEx पहल के हिस्से के रूप में नवंबर 2023 में लॉन्च करने का कार्यक्रम तय है।
5. प्राइम 1 – नासा सीएलपीएस लूनर लैंडर (लॉन्च: नवंबर 2023):
इंटुएटिव मशीन्स 2 (आईएम-2) का लक्ष्य इन-सीटू संसाधन उपयोग को प्रदर्शित करने और उपसतह नमूनों की अस्थिर सामग्री को मापने के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास नोवा-सी लैंडर और एक ड्रिल को उतारना है।
6. चांग’ई 6 – सीएनएसए (चीन) चंद्र नमूना रिटर्न मिशन (लॉन्च: 2024):
चांग’ई 6 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से नमूने वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो चीन के चल रहे मून एक्सप्लोरेशन प्रयासों में योगदान देगा।
इस साल लॉन्च होने वाले ज्यादातर मून मिशनों में नासा (अमेरिका) के मिशन शामिल हैं। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ‘रोस्कोस्मोस’ को उसके चंद्र अभियान ‘लूना-25’ के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई दी, जो 47 वर्षों में देश का पहला चंद्र अभियान है। रूसी अभियान भारत के चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर पहुंचने की समयसीमा से मेल खाता है क्योंकि दोनों देशों के लैंडर के 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतरने की संभावना है। भारत और रूस दोनों का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बनने का लक्ष्य है।