
आज से दो दशक पहले 2022 में कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया को जेल भेजने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उनके कब्जे वाले तालाब और आसपास की जमीनों को अधिग्रहित कर डॉ. भीमराव अंबेडकर बेंती पक्षी विहार का निर्माण कराया था।
हालांकि उसमें न तो पक्षियों ने ठिकाना बनाया और न ही यह स्थान पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सका। सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करके बना बेंती पक्षी विहार जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।
दिसम्बर 2002 में राजा भैया की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती से राजनीतिक दूरियां बढ़ गई थीं। नाराज मुख्यमंत्री ने न केवल राजा भैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर जेल भेजा बल्कि उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह, खास सिपहसलार अक्षय प्रताप सिंह गोपाल को भी जेल भेजा। सभी पर पोटा भी लगाया। पिता-पुत्र को जेल भेजने के बाद मायावती ने 2003 में राजा भैया के चर्चित बेंती तालाब और आसपास की जमीनों को अधिग्रहित कर डॉ. भीमराव अम्बेडकर बेंती पक्षी विहार का निर्माण कराया था।
बेंती पक्षी विहार में वनकर्मियों की तैनाती की गई। मुख्य प्रवेश द्वार के पास कर्मियों के रहने, वेटिंग हाल बनवाया। पूरे पार्क में रास्ते के लिए खड़ंजा, पेयजल के लिए हैंडपंप लगवाया। अधिकारियों के ठहरने के लिए आलीशान गेस्ट हाउस भी बना। लेकिन सरकार बदलने के बाद से बेंती पक्षी विहार के दुर्दिन शुरू हो गए जो अब तक जारी है। मौजूदा समय में गेस्ट हाउस समेत परिसर में बने अन्य भवन, मूर्तियों के आसपास बड़ी कंटीली झाड़ियां उग आई है। परिसर का खड़ंजा ध्वस्त हो चुका है, विद्युत पोल की दुर्दशा है। अब वन विभाग के अधिकारी केवल कागज पर डूयूटी कर रहे हैं। अब यहां पक्षियों की चहचहाहट बिहार नहीं करता, केवल नाम का पक्षी विहार रह गया है।