पहले भी किया है, सिसोदिया फिर सबूत से छेड़छाड़ कर सकते हैं; CBI ने SC से कहा

 दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आरोपी मनीष सिसोदिया की जमानत पाने की राह इतनी आसान नहीं है। सीबीआई ने अब सुप्रीम कोर्ट में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध किया है और अदालत से आग्रह किया है कि इस याचिका को रद्द किया जाए।सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सिसोदिया शराब घोटाले से जुड़ी इस पूरी साजिश के किंगपिन और वास्तुकार हैं। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सिसोदिया को आगे की जांच के बारे में अच्छी तरह से पता है। उन्हें इस बड़ी साजिश और पंजाब के आबकारी अधिकारियों की इस साजिश में भूमिका के बारे में भी पता है। सीबीआई ने कहा कि इस बात की संभावना है कि अगर सिसोदिया को जमानत मिल जाती है तो वो सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं ऐसा उनके द्वारा पूर्व में किये गये कार्यों को देख कर लगता है। जांच एजेंसी ने अदालत से कहा कि मौजूदा मामले से जब गृहमंत्रालय ने सीबीआई को यह केस दिया था तब उन्होंने अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिये थे।

बहस के दौरान सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का एग्जीक्यूटिव, अधिकारियों और ब्यूरोक्रेट्स से नजदीकी नेक्सस है और वो सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। उनके पार्टी के लोग ऊंचे पदों पर हैं औऱ वो लगातार जांच को प्रभावित करने के लिए गलत बयानबाजी कर रह हैं और वो यह भी दावा करते हैं कि याचिकाकर्ता राजनीति के शिकार हैं।

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया आबकारी नीति घोटाले में कथित गड़बड़ी के आरोपों से घिरे हैं। सिसोदिया ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े केस में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया था। 3 जुलाई, 2023 को ईडी से जुड़े केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपी का अपने पार्टी में बड़े कद को देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

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