महंत राजूदास, अयोध्या के वो संत जो भाजपा की हार पर कलेक्टर से भिड़ गए, सरकार ने वापस ली सुरक्षा

योध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजूदास लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। इस बार वह एक बहस की वजह से चर्चा में हैं। उनकी यह बहस शुक्रवार की रात अयोध्या के कलेक्टर नीतीश कुमार से एक मीटिंग के दौरान हुई।

जिसके बाद उनको सुरक्षा के लिए दिए गए पुलिस जवानों को भी हटा लिया गया। दरअसल, शुक्रवार को यूपी कैबिनेट में मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जयवीर सिंह ने अयोध्या में पार्टी की हार पर एक मीटिंग बुलाई थी जिसमें महंत राजूदास और कलेक्टर नीतीश कुमार भी पहुंचे। यहां पर महंत राजूदास ने नीतीश कुमार को हार का जिम्मेदार बताया और कहा कि इनकी हरकतों की वजह से भाजपा यहां हारी है। जिसके बाद दोनों में ही बहस शुरू हो गई।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए महंत ने कहा कि मैंने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी, मुझे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उनके न्याय में पूरा विश्वास है।
मंहत से लगातार विवादों में घिरे रहने के बारें में उन्होंने बताया कि मैं केवल बयान नहीं देता बल्कि उनको सत्य मानता हूं और तभी बोलता हूं। मैं सनातन धर्म का योद्धा हूं और यह मेरी धर्म है कि मैं इसकी रक्षा करूं। अगर कोई मेरे धर्म पर हमला करेगा तो मैं चुप नहीं बैठूंगा बल्कि उसका पूरी ताकत के साथ जवाब दूंगा। जैसे उपमुख्यमंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जब रामचरित मानस के बारे में बोला तो मैंने न केवल उसका जवाब दिया बल्कि अपना पक्ष भी साफ रखा।

महंत राजूदास की सुरक्षा हटाए जाने के संबंध में जब अयोध्या कलेक्टर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि महंत के खिलाफ तीन अपराधिक मामले दर्ज हैं इसी कारण से उनकी सुरक्षा को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार की घटना का इससे कोई लेना देना नहीं है यह प्रक्रिया बहुत पहले ही शुरू हो चुकी थी। तीन सुरक्षाकर्मियों में से दो को पहले हटा लिया गया था जबकि एक को अभी हाल ही में हटा लिया गया है।

इसके जवाब में महंत ने कहा कि पहले दो केस मेरे खिलाफ 2013 में और 2017 में हुए जो कि धरना प्रदर्शन और धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े हुए थे तो वहीं एक केस 2017 में एक साधु के द्वारा गलती से किया गया था जिसमें वह किसी और का नाम डालना चाहता था लेकिन गलती से मेरा चला गया।

महंत राजूदास कैसे पहुंचे हनुमान गढ़ी
महंत राजूदास के बचपन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने उन्हें भगवान हनुमान को अर्पित कर दिया था, जब वह केवल साढ़े चार साल के थे। उसके बाद मेरे गुरू महंत संत रामदास ने मेरी परवरिश की। मंदिर की सेवा करते हुए मैंने अपनी स्कूली पढ़ाई और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की।

महंत राजूदास ने बताया कि वह अयोध्या के साकेत पीजी कॉलेज में पढ़ने के दौरान राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। इसके बाद अपनी मास्टर्स की डिग्री राजनीति विज्ञान में पूरी की, इसके बाद एलएलबी की पढ़ाई भी की। 2018 तक विद्यार्थी परिषद के साथ रहने के बाद संघ के प्रचारक के रूप में काम किया।

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