महाकुंभ 2025 का आयोजन श्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का सनातन के प्रति जो प्रेम है :सीनियर कद्दावर नेता श्रीमती भावना बहन दबे

महाकुंभ 2025 का आयोजन प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा. ऐसे में महाकुंभ की तैयारियां भी जोरो शोरों से हो रही थी । और अलग-अलग अखाड़ों के द्वारा भूमि पूजन और ध्वजा स्थापित करने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है. इस बारे प्रयागराज में महाकुंभ के महत्व पर श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत दुर्गादास ने . महंत दुर्गा दास ने अखाड़े का परिचय श्री श्री 108 पूज्यपाद अखंड अद्वैत श्रीसत पंचमेश्वर पंचायती अखाड़ा, मुख्यालय प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के रूप में देते हुए बताया कि अखाड़े का बहुत ही प्राचीन इतिहास है. यह ब्रह्माजी के मानस पुत्र के समय से चला आ रहा है. इसी संप्रदाय में भगवान शिव का बाल रूप में प्रादुर्भाव हुआ और 149 वर्षों तक भगवान श्रीकृष्ण धरा धाम पर रहकर अंतर्ध्यान हुए. वह आज भी विराजमान होते हैं और सभी भक्तों की सच्ची मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. “सभी अखाड़ों का प्रमुख स्नान 14 जनवरी, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी को होता है. इसे हम विशेष स्नान, देवऋषि स्नान, राष्ट्रीय स्नान जैसी संज्ञा देने जा रहे हैं. अखाड़े की प्राचीन परंपरा है. तब उस समय के हिसाब से व्यवस्था चलती थी. आज के समय में 200 से 300 गुना ज्यादा व्यवस्था शासन और प्रशासन की ओर से की गई है ताकि श्रद्धालुओं को कष्ट ना हो।
इसी दौरान गुजरात से भारतीय जनता पार्टी की सीनियर कद्दावर नेता श्रीमती भावना बहन दबे ने काशी विश्वनाथ। मंदिर अयोध्या प्रभु श्री राम जीके दर्शन के साथ-साथ प्रयागराज में पावन। दिवस पर संगम पर स्नान कर संतो महंतो से मुलाकात की।और वहाँ की व्यवस्था की खूब। तारीफ की। इस दौरान बहन भावना दबे ने निरंजन पीठाधीश्वरश्रीश्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वरNस्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराजएवं से मुलाकात की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का बहुत बहुत धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज का यह अद्वित्त नजारा देखकर मैं भाव भू बिभोर हो गई आज यह आयोजन प्रधानमंत्री जी का एवं योगी आदित्यनाथ के सनातन के प्रति जो प्रेम है उसके कारण ही यह संभव हुआ है उन्होंने यह भी कहा कि वह काशी विश्वनाथ। मंदिर के दर्शन भी करके आए हैं। और साथ में ही अयोध्या। श्रीरामलल्ला जीके भी दर्शन किए हैं। बनारस से लेकर प्रयागराज तक। जो धार्मिक वातावरण दिखाई दिया।वह गौरवपूर्ण है। ये एक समय मेरा सपना था और ऐसा लग रहा था इस यात्रा के दौरान सही मायने में सनातन धर्म। के प्रति आस्था एवं निष्ठा।रखने वाले लोगों के लिए। यह पल बड़े गौरव का है और मेरा सन्देश यही है की ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग इस महापर्व। में आए और साथ ही में देश के समस्त लोगों को अपने परिवार के साथ आना चाहिए जिससे कि हमारे धार्मिक सनातनी परंपरा का पता उनको उनके बच्चों को चलें।

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