करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उद्घाटन के करीब एक महीने के भीतर ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में बार-बार टूटने और धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। रविवार को हुई बारिश के बाद एक्सप्रेसवे करीब 10 जगहों पर धंस गया, जबकि कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति भी बन गई। इससे इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश के बाद 10 जगहों पर धंसा Lucknow-Kanpur Expressway
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। रविवार को हुई बारिश के बाद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने की समस्या सामने आई। कानपुर से लखनऊ की ओर आने वाली लेन में जगह-जगह पानी जमा हो गया।
जानकारी के मुताबिक, किलोमीटर संख्या 47.9 से 14.1 के बीच करीब 800 मीटर हिस्से में और किलोमीटर संख्या 46.6 से 46.3 के बीच करीब 300 मीटर सड़क पर जलभराव हो गया। इसके अलावा किलोमीटर संख्या 45.5, 44.4 और 41.3 के आसपास भी कई जगह सड़क बारिश के पानी के कारण धंस गई।
कई स्थानों पर एक्सप्रेसवे की सड़क टूटी हुई नजर आई। बताया जा रहा है कि इन हिस्सों में बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। एक स्थान पर नाली भी टूट गई, जिसके कारण एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई।
13 जुलाई को हुआ था Expressway का उद्घाटन
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। उद्घाटन के बाद से ही एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क टूटने और धंसने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके चलते एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
करीब एक महीने पहले तैयार हुए इस एक्सप्रेसवे की मरम्मत का काम भी लगातार किया जा रहा है। हालांकि, बारिश के बाद कई हिस्सों में दोबारा सड़क खराब होने से पहले किए गए मरम्मत कार्यों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
Patchwork पर भी उठ रहे सवाल
एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। जिन हिस्सों में पहले पैचवर्क के जरिए सड़क की मरम्मत किए जाने का दावा किया गया था, उनमें से कुछ जगहों पर बारिश के बाद यह मरम्मत भी उखड़ती दिखाई दे रही है।
जानकारों का मानना है कि एक्सप्रेसवे की खराब होती स्थिति को लेकर बढ़ती आलोचना से बचने के लिए जल्दबाजी में पैचवर्क किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर सड़क की मूल समस्या और जल निकासी व्यवस्था को ठीक किए बिना केवल ऊपरी सतह पर मरम्मत की जाती है तो बारिश के दौरान समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के करीब 10 स्थानों पर सड़क धंसने और कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति ने एक बार फिर इसके निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।