उत्तर प्रदेश में वर्षों से लंबित चकबंदी की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए योगी सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लंबे समय से अटकी चकबंदी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में छह जिलों के 13 गांवों को जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है।
सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य लंबे समय से लंबित चकबंदी मामलों का निस्तारण करना और किसानों को उनकी जमीन से जुड़े मामलों में समयबद्ध राहत दिलाना है। इसके साथ ही किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
छह जिलों के 13 गांव चकबंदी प्रक्रिया से बाहर
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देश पर छह जिलों के कुल 13 गांवों को धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें कुछ गांव ऐसे हैं, जहां कई वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी।
मैनपुरी का भांती गांव करीब 35 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया में था। वहीं बदायूं का सिरतौल गांव 14 वर्षों से इस प्रक्रिया में लंबित था। उन्नाव के दरौली, पीखी, सर्लीद और निहालपुर तथा लखनऊ के शिवपुरी गांव में 12 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी।
इसी तरह बरेली का कादरगंज गांव 10 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित था। इसके अलावा बिजनौर के हसनअलीपुर और बैबलवाला तथा बदायूं के बक्सेना और इमलिया गांवों को भी चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है।
आखिर इन गांवों में क्यों अटकी थी चकबंदी?
इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही थीं। इनमें कुछ गांवों का विकास योजना में शामिल होना, नदी के कटान से प्रभावित होना और चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होना प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ गांव औद्योगिक विकास क्षेत्र में भी शामिल हो गए हैं। इन परिस्थितियों के चलते संबंधित गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उन्हें निर्धारित कानूनी प्रावधान के तहत प्रक्रिया से अलग किया गया है।
मुजफ्फरनगर में 16 साल पुरानी चकबंदी प्रक्रिया पूरी
इसी अभियान के तहत मुजफ्फरनगर के पीपलशाह गांव में भी बड़ी प्रगति हुई है। यहां 16 वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को काफी प्रयासों के बाद जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत पूरा कर लिया गया है।
लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण से जमीन से जुड़े विवादों और प्रक्रियात्मक अड़चनों को कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार की ओर से लंबित चकबंदी मामलों को जल्द निपटाने की दिशा में की जा रही कार्रवाई का सीधा असर किसानों से जुड़े भूमि मामलों के समयबद्ध निस्तारण पर पड़ने की उम्मीद है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?
चकबंदी की प्रक्रिया का सीधा संबंध किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और भूमि व्यवस्था से है। वर्षों तक प्रक्रिया लंबित रहने से जमीन से संबंधित मामलों के निस्तारण में देरी हो सकती है। ऐसे मामलों को कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाने या समाप्त करने से प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की इस कार्रवाई से छह जिलों के 13 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया से जुड़ी लंबित स्थिति को समाप्त किया गया है, जबकि मुजफ्फरनगर के पीपलशाह गांव में 16 साल पुरानी प्रक्रिया को पूरा किया गया है।