बिहार की राजनीति में आज एक अनोखा और भावुक नजारा देखने को मिला. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आज अपने बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव के सरकारी आवास पर पहुंचे. यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि साल 2025 में लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और घर से निष्कासित कर दिया था. करीब 7 महीने की लंबी दूरी के बाद पिता आज बेटे के घर मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित ‘चूड़ा-दही भोज’ में शिरकत करने पहुंचे थे. बिहार में इस भोज की परंपरा 90 के दशक में खुद लालू यादव ने शुरू की थी, और आज तेज प्रताप उसी विरासत को अपने अंदाज में आगे बढ़ाते नजर आए.
इस कार्यक्रम के दौरान तेज प्रताप यादव पूरी तरह से पिता की सेवा में लीन दिखाई दिए. आयोजन के वक्त जब लालू यादव वहां बैठे थे, तो उनके चेहरे पर सूरज की सीधी धूप आ रही थी, जिससे उन्हें परेशानी हो रही थी और उन्होंने अपना हाथ सिर पर रखा हुआ था. पिता को परेशान देख तेज प्रताप ने तुरंत अपने सहयोगियों को निर्देश दिया और गमछे जैसा एक कपड़ा मंगवाया. उन्होंने खुद खड़े होकर उस कपड़े से पिता के सिर पर छाया की, ताकि राजद चीफ को धूप से बचाया जा सके. सियासी गलियारों में इस दृश्य की काफी चर्चा हो रही है.
मकर संक्रांति के बाद बिहार में अक्सर सियासी खिचड़ी पकती है और रिश्तों के समीकरण बदलते हैं. तेज प्रताप ने इस भोज के जरिए एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया है. उन्होंने इस कार्यक्रम में अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा एनडीए (NDA) और महागठबंधन के कई दिग्गज नेताओं को न्योता दिया था. कयास लगाए जा रहे हैं कि मकर संक्रांति के बाद तेज प्रताप कोई बड़ा सियासी फैसला ले सकते हैं, क्योंकि हाल के दिनों में एनडीए से उनकी नजदीकियां बढ़ती देखी गई हैं. भोज में लालू यादव के अलावा बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, आरलजेपी प्रमुख पशुपति पारस, मामा साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और जदयू विधायक चेतन आनंद ने भी शिरकत की.