इमरजेंसी में मोदी, नड्डा का नाम नहीं सुना, इंदिरा ने हमें देशद्रोही नहीं कहा: लालू यादव

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं पर करारा हमला बोला है। लालू ने कहा कि इमरजेंसी के समय वह जय प्रकाश नारायण (जेपी) से जुड़े हुए थे।

उस समय वे 15 महीने मीसा एक्ट के तहत जेल गए। मगर उस समय वे बीजेपी के कई बड़े नेताओं के बारे में जानते तक नहीं थे, जो आज आपातकाल पर बोल रहे हैं। लालू ने कहा, यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत केंद्रीय कैबिनेट के कई मौजूदा मंत्रियों का नाम भी उन्होंने या उनके साथियों ने नहीं सुना था, जो आज हमें आजादी का पाठ पढ़ा रहे हैं।

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आपातकाल की बरसी पर लिखा गया अपना लेख साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनके जैसे कई लोगों को इमरजेंसी के दौरान सलाखों के पीछे डाल दिया था, लेकिन उन्होंने कभी गालियां नहीं दीं। लालू ने बताया कि इंदिरा या उनके किसी भी मंत्री ने उन्हें एंटी नेशनल या देशद्रोही नहीं कहा था। उन्होंने कभी भी हमारे संविधान के निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की यादों को मिटाने का काम नहीं किया। लालू ने कहा कि 1975 का आपातकाल देश के लोकतंत्र पर धब्बा है, लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि 2024 में विपक्ष को सम्मान नहीं मिल पा रहा है।

बता दें कि लालू यादव की गिनती उन समाजवादी नेताओं में होती है, जो जेपी आंदोलन से निकले और बाद में राजनीति में अपनी छाप छोड़ दी। लालू प्रसाद यादव इमरजेंसी के समय तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के विरोध में डटे रहे और जेल गए। इसी दौरान लालू की पत्नी राबड़ी देवी ने बेटी को जन्म दिया था। लालू ने अपनी बेटी का नाम मीसा भारती ही रख दिया, क्योंकि मीसा एक्ट के तहत ही उन्हें इंदिरा सरकार ने जेल में डाला था।

लालू यादव की आरजेडी अब कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन में हैं। बीजेपी के नेता उन्हें अक्सर इस बात के लिए चिढ़ाते हैं कि जिस कांग्रेस सरकार ने उन्हें जेल में डाला था। जिस पार्टी की खिलाफत करते हुए वे राजनीति में आए, आज उसी कांग्रेस की गोदी में जाकर बैठ गए हैं। हाल ही में आपातकाल की बरसी पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा था कि आज जितने भी नेता दिख रहे हैं, वो जेपी आंदोलन की उपज हैं। जो उस समय आपातकाल के खिलाफ थे।

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