दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कई आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से हटाने की मांग की है। नेताओं ने केस को किसी निष्पक्ष बेंच में ट्रांसफर करने की अपील की है।
पत्र में पक्षपात के आरोपों का दावा
चीफ जस्टिस को भेजी गई चिट्ठी में दावा किया गया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के कुछ आदेशों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही पलट चुका है। पत्र में कहा गया कि सुनवाई दूसरी बेंच में स्थानांतरित किए जाने से न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहेगी और आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। नेताओं ने आरोपों से जुड़े सबूत पेश करने का भी दावा किया है।
9 मार्च को जारी हुआ नोटिस
गौरतलब है कि हाल ही में सीबीआई अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए 9 मार्च को हाई कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों से उनका पक्ष मांगा था।
16 मार्च को होगी अगली सुनवाई
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए तय की है। साथ ही निचली अदालत द्वारा सीबीआई अधिकारियों पर की गई टिप्पणियों पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट से मिली थी राहत
27 फरवरी को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 23 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद कोर्ट से राहत मिलने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया था। वहीं अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि दिल्ली में सरकार बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ साजिश रची गई।
सीबीआई ने इसी फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है, जिसके बाद अब मामले में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर हलचल तेज हो गई है।