कनाडाई राजनयिक वापस भेजने पर खफा अमेरिका और ब्रिटेन, क्या अब भारत पर बना रहे दबाव?

भारत से कनाडाई राजनयिकों को बाहर निकालने को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन कनाडा का सपोर्ट करते नजर आ रहे हैं। यूएस और यूके ने अपील की है कि कनाडा की राजनयिक उपस्थिति को कम करने पर भारत जोर न दे।इन देशों ने ओटावा की ओर से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने पर भी चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, ‘हम कनाडाई राजनयिकों के भारत से वापस बुलाने को लेकर चिंतित हैं जो कि भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति को कम करने की नई दिल्ली की मांग के बाद उठाया गया कदम है।’ दरअसल, इस साल जून में खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। इस मामले में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनयिक तनाव पैदा गया था।

अमेरिका का कहना है कि उसने कनाडा के आरोपों को गंभीरता से लिया है। वाशिंगटन और लंदन ने भारत से हत्या मामले की जांच में कनाडा का सहयोग करने की अपील की है। हालांकि, पश्चिमी देश इस विवाद को लेकर अब तक भारत की खुले तौर पर निंदा करने से बचते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यूके और यूएस भारत के साथ संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। वे नई दिल्ली को अपने मुख्य एशियाई प्रतिद्वंद्वी चीन के प्रति संतुलन के तौर पर देखते हैं। मगर, अमेरिकी विदेश विभाग और ब्रिटेन के विदेश कार्यालय का ताजा बयान इस मामले में नई दिल्ली की सीधे तौर पर आलोचना है। इसे भारत पर दबाव बनाने का प्रयास भी माना जा रहा है। ब्रिटिश विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम भारत सरकार के फैसलों से सहमत नहीं हैं, जिसके चलते कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा। राजनयिकों की सुरक्षा प्रदान करने वाले विशेषाधिकारों को एकतरफा हटाना वियना समझौते के तहत नहीं है।’

अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन से भारत का इनकार
भारत ने कनाडाई राजनयिकों की वापसी को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन के रूप में पेश करने की कनाडा की कोशिशों को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दो-तरफा राजनयिक समानता सुनिश्चित करना पूरी तरह से राजनयिक संबंधों को लेकर हुई वियना संधि के प्रावधानों के अनुरूप है। भारत की यह टिप्पणी कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली की ओर से भारत से राजनयिकों की वापसी की घोषणा के बाद आई है, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली की कार्रवाई को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत’ और राजनयिक संबंधों पर वियना संधि का उल्लंघन बताया था। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि समानता लाने के भारत के निर्णय के बारे में लगभग एक महीने पहले कनाडा को अवगत कराया गया था। इसे लागू करने की तारीख 10 अक्टूबर थी, लेकिन इसे 20 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया था क्योंकि समानता लागू करने के तौर-तरीकों पर कनाडाई पक्ष से परामर्श से काम किया जा रहा था।

कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक संख्या: भारत
पिछले महीने भारत ने कनाडा से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने को कहा था। भारत ने साथ ही कनाडा के आरोपों को दृढ़ता से खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘हमने भारत में कनाडाई राजनयिकों की उपस्थिति के संबंध में 19 अक्टूबर को कनाडा सरकार की ओर से दिया गया बयान देखा है। हमारे द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति, भारत में कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक संख्या और हमारे आंतरिक मामलों में उनका निरंतर हस्तक्षेप नई दिल्ली और ओटावा में पारस्परिक राजनयिक उपस्थिति में समानता को वांछित बनाता है।’ एक सूत्र ने कहा कि बेंगलुरु, मुंबई और चंडीगढ़ में कनाडा के वाणिज्य दूतावासों में राजनयिक संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। भारत में अपने तीन वाणिज्य दूतावासों में कामकाज रोकने का कनाडा का फैसला एकपक्षीय है और समानता के क्रियान्वयन से संबंधित है।

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