कल्याण के दुर्गादी किले पर मुस्लिम पक्ष का दावा खारिज, 50 साल बाद आया फैसला

कल्याण के दुर्गादी किले में स्थित ऐतिहासिक देवी मंदिर पर मुस्लिम पक्ष की ओर से किया जा रहा दावा कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह मामला 1974 में कल्याण सिविल कोर्ट में दायर किया गया था, जिस पर अब फैसला आया है.कल्याण के दुर्गादी किले को सरकार ने 1966 में अपने कब्जे में ले लिया था. हालांकि मुशवरीन औकाफ संगठन का दावा है कि इसका स्वामित्व उसके पास है. 1974 में कल्याण सिविल कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से एक दावा किया गया था, जिसमें कहा गया था कि यह ‘मैलिस-ए-मुशवरीन मस्जिद है, इसलिए इसे वक्फ को सौंपा जाए. इसी मामले पर आज फैसला आया है.
क्या था पूरा मामला?
कल्याण के ऐतिहासिक दुर्गादी जिले को 1966 में सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया था. यहां एक मुस्लिम ईदगाह और मस्जिद भी है, इस पर मुशवरिन औकाफ एसोसिएशन ने दावा किया कि इस जगह का स्वामित्व उनके पास है. इस आधार पर इसका सौंदर्यीकरण कराया जाने लगा. बाद में ठाणे जिले के लोक निर्माण विभाग ने इस पर आपत्ति जताई. मामला कोर्ट पहुंचा. 1974 में दायर याचिका के मुताबिक मुस्लिम पक्ष ने इसका स्वामित्व देने की मांग की, जिसे कोर्ट ने अब जाकर खारिज किया है.
कोर्ट ने क्या कहा
कल्याण सिविल कोर्ट के जज एएस लांगेवार ने मुस्लिम पक्ष्ज्ञ के दावे कर खारिज करते हुए कहा कि यह जगह सरकार की है. यहां का कानूनी स्वामित्व मुशवरिन औकाफ के पास नहीं है. उन्हें इसका कोई अधिकार नहीं है.
हिंदू मंच के अध्यक्ष दिनेश देशमुख ये बोले
फैसले पर हिंदू मंच के अध्यक्ष दिनेश देशमुख ने कहा कि वर्ष 1971 में, ठाणे जिला अधिकारी के कार्यालय ने इस इमारत को मंदिर घोषित कर दिया था. इसलिए फैसले के लिए हम अदालत का धन्यवाद देते है. उन्होंने कहा कि यह एक मंदिर है, यहां मूर्ति खड़ी होने की भी जगह है. कोर्ट ने आदेश में ये स्पष्ट कर दिया है. कोर्ट के आदेश के बाद फोर्ट के पास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.

 

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