चंपाई सोरेन के सामने थे 3 रास्ते, एक को कर दिया बंद; बताया अपना प्लान

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा है कि वे राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे। अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए राजनीति में रहना जरूरी है। झारखंड की जनता का स्नेह और आग्रह के मद्देनजर उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने के अपने पहले के निर्णय को त्याग दिया है।मंगलवार देर रात मंत्री चंपाई सोरेन दिल्ली से हवाई मार्ग से कोलकाता पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत जिलिंगगोडा स्थित आवास पहुंचे।

आवास पर स्वागत में देर रात तक समर्थक और कार्यकर्ता डटे रहे। आवास पहुंचने पर मंत्री चंपाई सोरेन ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान मंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद 3 जुलाई को ही उन्होंने स्थिति को स्पष्ट कर दिया था, जिसपर वह आज भी कायम हैं। बुधवार सुबह से उनके जीलिंगगोडा आवास पर जुटी कार्यकर्ताओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को एडी चोटी एक करना पड़ा।

इस दौरान जिलिंगगोड़ा मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चंपाई ने कहा, ‘तीन विकल्प मेरे पास मौजूद थे, जिसमें राजनीति से संन्यास लेना संभव नहीं है। राज्य की जनता और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर सक्रिय राजनीति में बने रहना है।’ उन्होंने कहा कि अब उनके सामने दो विकल्प हैं कि किसी साथी (पार्टी) के साथ आगे बढ़ें या नए सिरे से संगठन बनाकर जनता की सेवा करें। चंपाई ने फिर कहा कि उनका घोर अपमान हुआ है, जिसे बयां करना मुश्किल है। अपने आवास से निकल कर चंपई सोरेन महुलडीह स्थित कार्यालय भी गए, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका जमकर स्वागत किया।

चंपाई सोरेन के भारतीय जनता पार्टी में भी शामिल होने की अटकलें हैं। हालांकि, उन्होंने ना तो इसे स्वीकार किया है और ना ही इनकार किया है। भाजपा नेता भी चंपाई की तारीफ करके उन पर डोरे डाल रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव से पहले चंपाई की राजनीति किस करवट बैठती है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री बनाए गए चंपाई का कहना है कि हेमंत सोरेन ने रिहाई के बाद अपमानित करते हुए उन्हें पद से हटा दिया।

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