
इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बुधवार को स्पेस एजेंसी के भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंडियन स्पेस के ‘अमृतकाल’ के दौरान एप्लिकेशन, सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में खूब संभावनाएं हैं।
सोमनाथ ने कहा, ‘जब हम अपने अमृतकाल में पहुंचेंगे तो हमारी अर्थव्यवस्था में स्पेस का शेयर काफी अधिक होगा। यह द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में गिना जाएगा। यह महज रॉकेट और सैटेलाइट बनाने से नहीं होगा। भारत में यह एप्लिकेशन, सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग के निर्माण से हो सकता है।’ ISRO प्रमुख ने अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (AIMA) के 50वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
एस सोमनाथ ने बताया कि हाइपरलोकल वेदर अपडेट सर्विस, मैप सर्विस, रिमोट सेंसिंग और कम्युनिकेशन एप्लिकेशन निर्माण की योजनाएं हैं जिनका आने वाले समय में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारी ओर से बेहतर इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। मालूम हो कि एस सोमनाथ ने 14 जनवरी, 2022 को अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाला था। 2047 तक भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था इसकी कुल GDP का 1.8 प्रतिशत यानी 0.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने की उम्मीद है। दुर्लभ धातुओं और खनिजों का खनन, स्पेस रियल एस्टेट और अंतरिक्ष में बने उत्पाद स्पेस सेक्टर में उभरते रुझानों में शामिल हैं।
देश में नए टैलेंट सामने लाने का पूरा प्रयास: इसरो चीफ
ISRO चीफ ने टैलेंटेड युवाओं की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसरो अपने कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम टैलेंट के लिए कई सारे संस्थानों के साथ काम कर रहे हैं। इसरो ऐसा सिस्टम तैयार करने वाला बिल्डर है जो विज्ञान के नतीजे सामने लाता है। हमें ऐसी प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और संस्थानों की जरूरत है जिनके पास महान वैज्ञानिक हों और वे डेटा का अर्थ समझ सकें।’ उन्होंने बताया कि प्रतिभाएं सामने लाने के लिए देश में IITs, IISERs और रिसर्च प्रयोगशालाओं के साथ लगातार बातचीत चलती रहती है।