अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप प्रशासन की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि ईरान ने इस प्रस्तावित डील के तहत कभी भी परमाणु हथियार न बनाने और न हासिल करने का वादा किया है। इसके बदले में प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह कड़े सत्यापन और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण प्रक्रिया पर निर्भर होगी।
अधिकारी के अनुसार, समझौते का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि ईरान को किसी भी प्रकार का लाभ तभी मिलेगा जब वह अपने सभी वादों और शर्तों को पूरा करेगा।
इजरायल और खाड़ी देशों का भी मिल सकता है समर्थन
ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि इस समझौते को क्षेत्रीय सहयोगियों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इजरायल और खाड़ी देशों के साथ लगातार संवाद जारी है और अमेरिका को विश्वास है कि वे भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित देश अपनी सुरक्षा संबंधी नीतियों से समझौता करेंगे। यदि भविष्य में ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
ईरान के भीतर भी सहमति का दावा
अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की विभिन्न शक्ति संरचनाओं के बीच इस समझौते को लेकर व्यापक सहमति दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, ईरान के नागरिक नेतृत्व, सुरक्षा प्रतिष्ठान और अन्य प्रभावशाली समूहों के बीच इस डील को लेकर सकारात्मक माहौल है।
उन्होंने कहा, “हम IRGC, कट्टरपंथियों और नागरिक नेतृत्व के बीच इस बात पर आम सहमति देखते हैं कि यह एक अच्छी और स्वीकार्य डील है. इसलिए हमें पूरा भरोसा है कि सिस्टम के भीतर सहमति है. इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ असहमति नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि असहमति बहुत कम है.”
‘जब तक अमेरिका को फायदा नहीं, ईरान को भी नहीं’
वरिष्ठ अधिकारी ने समझौते की संरचना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह डील चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। उनके अनुसार, अमेरिका ने ऐसा तंत्र तैयार किया है जिसमें ईरान को तब तक कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा जब तक अमेरिका और उसके सहयोगियों को समझौते के अनुरूप परिणाम नहीं मिल जाते।
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हमने इस डील को इस तरह से तैयार किया है कि जब तक हमें फ़ायदा नहीं मिलता, तब तक उन्हें भी फ़ायदा नहीं मिलेगा.”
परमाणु कार्यक्रम पर होगी कड़ी निगरानी
अधिकारी के मुताबिक, ईरान ने परमाणु सामग्री को समाप्त करने और कुछ परमाणु स्थलों को बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि इन मुद्दों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर अभी भी बातचीत जारी है।
उन्होंने कहा कि ईरान ने अनिश्चित काल तक परमाणु हथियार न बनाने और न हासिल करने का वादा किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की प्रतिबंध राहत केवल स्वतंत्र सत्यापन और निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगी।
60 दिनों तक चलेगी तकनीकी बातचीत
समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की तकनीकी वार्ता अवधि निर्धारित की गई है। अधिकारी के अनुसार, इस अवधि को समझौते के ज्ञापन (MOU) में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इस दौरान दोनों पक्ष तकनीकी और निगरानी संबंधी प्रावधानों को अंतिम रूप देंगे।
यदि बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।