ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद नहीं किया है. यह खुला हुआ है. फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात और सुरक्षा परिस्थितियों की वजह से कई जहाज इस मार्ग से गुजर नहीं पा रहे हैं, लेकिन ईरान की ओर से इसे बंद करने का कोई इरादा नहीं रहा। उनके अनुसार ईरान कभी नहीं चाहता था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो या अवरुद्ध हो और अभी भी कुछ जहाज वहां से गुजर रहे हैं।
डॉ. इलाही ने युद्ध को लेकर भी कड़ा संदेश दिया और कहा कि इस युद्ध जिन्होंने की है, उन्हीं को इसे रोकना होगा. इस युद्ध के कारण दुनियाभर में बहुत से लोग कष्ट में हैं. दुनिया के नेताओं को एकजुट होकर अमेरिका के राष्ट्रपति पर प्रेशर बनाना चाहिए. उनसे आग्रह करना चाहिए कि वे इस अन्यायपूर्ण युद्ध को तुरंत रोकें.
भारत को लेकर ईरान का खास संदेश
भारत के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग के सवाल पर भारत में तैनात ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा, हां क्योंकि भारत हमारा दोस्त है. आप इसे दो या तीन घंटों के भीतर देख लेंगे. हमारा मानना है कि इस इलाके में ईरान और भारत के हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.
राजदूत ने दोनों देशों के संबंधों को दोस्ती और सहयोग पर आधारित बताते हुए कहा कि हमारा मानना है कि ईरान और भारत दोस्त हैं. हमारे हित एक जैसे हैं. हमारी आस्था एक जैसी है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कठिन समय में भारत ने ईरान का समर्थन किया और युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में भारत सरकार ने मदद पहुंचाई।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा गलियारों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस रास्ते में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और व्यापार पर पड़ता है।
भारत के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की बड़ी जरूरत इसी क्षेत्र से आयात करता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच विभिन्न सरकारें और शिपिंग कंपनियां इस इलाके की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऐसे समय में ईरान की ओर से भारत को लेकर आए संकेत ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।