पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का फैसला लेकर हालात और जटिल बना दिए हैं। इससे पहले इस अहम समुद्री मार्ग को खोलने का ऐलान किया गया था, लेकिन अब ईरान ने अपना रुख बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया है।
अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का आरोप, ईरान की चेतावनी
तेहरान ने अमेरिका पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और साफ कहा है कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित होती रहेगी। ईरान के ज्वाइंट मिलिट्री कमांड ने कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर अब फिर से सशस्त्र बलों का कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया गया है।
ईरानी सैन्य कमांड ने अमेरिका को धमकी दी कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखेगा, तब तक वह इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही को बाधित करता रहेगा.
कूटनीतिक प्रयासों के बीच बदला रुख
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए नए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। अमेरिका की ओर से यह साफ कर दिया गया कि ईरान से जुड़े जहाजों पर नाकेबंदी खत्म नहीं की जाएगी, जिसके बाद ईरान ने तुरंत अपना फैसला बदलते हुए होर्मुज पर फिर से सख्त नियंत्रण लागू कर दिया।
20 अप्रैल को हो सकती है अहम बातचीत
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का अगला दौर 20 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकता है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल 19 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं, जहां इस बढ़ते तनाव को कम करने पर चर्चा की जाएगी।
ट्रंप का सख्त रुख, नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भले ही ईरान ने शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का ऐलान कर दिया था, लेकिन अमेरिका की नाकेबंदी पूरी ताकत के साथ लगातार जारी रहेगी और ये नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक तेहरान वाशिंगटन के साथ किसी समझौता पर नहीं पहुंच जाता है, जिसमें उसका परमाणु कार्यक्रम भी शामिल है.
वैश्विक बाजार और शिपिंग पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इसके बार-बार बंद और खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। लगातार बदलते हालात से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।