नई दिल्ली। भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुहार लगाता दिखा। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में इस मुद्दे को उठाते हुए भारत पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया और खुद को पीड़ित बताने की कोशिश की।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया कि भारत ने सिंधु जल संधि का निलंबन करके अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत इस समझौते को एक “हथियार” की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को गंभीर नुकसान हो रहा है।
‘भारत का कदम लाखों पाकिस्तानियों के लिए संकट’
इफ्तिखार अहमद ने कहा, “भारत का एकतरफा फैसला सिंधु जल संधि की मूल भावना को कमजोर करता है। इससे उन लाखों लोगों की जिंदगी खतरे में आ गई है, जो खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस पानी पर निर्भर हैं। इससे केवल एक देश का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जल कानून का भी उल्लंघन हो रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत का यह कदम उस ऐतिहासिक समझौते के विपरीत है, जो 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। इस संधि के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया था — जिसमें पश्चिमी नदियों पर पाकिस्तान और पूर्वी नदियों पर भारत का नियंत्रण निर्धारित किया गया था।
भारत के कदमों से मची पाकिस्तान में बेचैनी
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का फैसला किया था। अब पाकिस्तान को अंदाजा हो गया है कि इस निर्णय का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि पर पड़ सकता है। इसी वजह से वह अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर भारत से संधि बहाल करने की अपील कर रहा है।
पाकिस्तानी राजदूत ने कहा, “संधि का कोई भी प्रावधान एकतरफा निलंबन या संशोधन की अनुमति नहीं देता है। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि भारत जल्द ही समझौते के सामान्य संचालन को बहाल करेगा।”