नई दिल्ली: मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की सफलता के बाद भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब सेना छोटे ऑपरेशंस के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तैयारी की रीढ़ अब विदेशी हथियार नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बना स्वदेशी गोला-बारूद है।
सेना की तैयारी से जुड़े 5 बड़े अपडेट:
- 90% ‘मेड इन इंडिया’: भारतीय सेना अब अपने कुल उपयोग का 90 प्रतिशत गोला-बारूद और सटीक हथियार (Precision Weapons) देश में ही बनवा रही है। आयात पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है।
- हजारों करोड़ के ऑर्डर:
- ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 16,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर विभिन्न चरणों में हैं।
- पिछले तीन सालों में भारतीय कंपनियों को 26,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद की आपूर्ति के ऑर्डर दिए जा चुके हैं।
- प्राइवेट कंपनियों की एंट्री: पहले जहां सिर्फ सरकारी ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां (OFB) गोला-बारूद बनाती थीं, वहीं अब अडानी डिफेंस, सोलर इंडस्ट्रीज, SMPP और भारत-फोर्ज जैसी करीब 20 निजी कंपनियां इस क्षेत्र में उतर चुकी हैं। सरकार ने इन्हें अगले 7-10 सालों तक लगातार ऑर्डर देने का भरोसा दिया है।
- दुश्मन को चेतावनी: प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि किसी भी आतंकी घटना को अब ‘युद्ध’ की तरह माना जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ‘पहलगाम हमले’ जैसी कोई दूसरी घटना हुई, तो भारत करारा जवाब देगा।
- 10 दिन से फुल स्टॉक तक: एक समय था जब सेना के पास युद्ध के लिए महज 10 दिन का गोला-बारूद बचा था (जनरल वीके सिंह के समय)। लेकिन पिछले 10 सालों में भारत के ‘रिजर्व वॉर-स्टोर’ (युद्ध भंडार) में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
बदलते वैश्विक समीकरणों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए, भारत ने अपनी ‘लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन’ को इतना मजबूत कर लिया है कि युद्ध लंबा चलने पर भी गोला-बारूद की कमी नहीं होगी।