रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि देश अपने राष्ट्रीय हित के अनुसार जहां से बेहतर कीमत मिलेगी वहीं से तेल खरीदेगा और इसके लिए किसी भी देश की अनुमति की जरूरत नहीं है।
अमेरिका की ओर से रूसी तेल व्यापार पर 30 दिनों की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे, लेकिन सरकार ने साफ किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से फैसले लेता है।
ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर: केंद्र सरकार
केंद्र सरकार के मुताबिक Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है। सरकार ने बताया कि देश ने कच्चे तेल के स्रोतों को पहले के 27 देशों से बढ़ाकर अब 40 देशों तक कर लिया है, जिससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक रास्ते तैयार हुए हैं।
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हित में भारत वही तेल खरीदेगा जहां से सबसे प्रतिस्पर्धी और किफायती दरें मिलेंगी। उन्नत रिफाइनरी क्षमता के कारण देश अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है, जिससे आपूर्ति प्रभावित नहीं होती।
रूस से तेल आयात जारी रहेगा
भारत ने शनिवार (7 मार्च 2026) को यह भी पुष्टि की कि अमेरिका की अस्थायी छूट के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रहेगा। यह छूट मध्य पूर्व में जारी युद्ध की स्थिति को देखते हुए दी गई थी।
केंद्र सरकार ने कहा कि नई दिल्ली को ऐसी खरीद के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है और भारत अपनी जरूरतों के आधार पर फैसले लेता रहेगा।
‘भारत को परमिशन की जरूरत नहीं’
सरकार ने कहा,
‘भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है. भारत फरवरी 2026 में भी रूसी तेल का आयात जारी रखेगा और रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा. रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन सालों के दौरान, भारत ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की आपत्तियों के बावजूद रूसी तेल खरीदना जारी रखा. रियायती कीमतों और रिफाइनरी की मांग के कारण 2022 के बाद आयात में बढ़ोतरी हुई.’
मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ा दबाव
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
अमेरिका ने गुरुवार (5 फरवरी 2026) को रूस पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी थी ताकि समुद्र में मौजूद रूसी तेल के जहाज भारत को सप्लाई कर सकें। इस पर केंद्र सरकार ने कहा,
‘रूस से व्यापार लगातार जारी रहा है. इस छूट के जरिए रूस के साथ हमारे ट्रेड को नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है. भारत दुनिया के रिफाइन्ड प्रोडक्ट का निर्यातक है और ये स्थिति उनकी ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करती है.’