प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही केजरीवाल पर लगाया गया 25 हजार रुपये का जुर्माना भी बरकरार रखा गया। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
हाईकोर्ट ने सिंगल जज के फैसले में दखल से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीए रे की बेंच ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने वाले सिंगल जज के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
केजरीवाल ने सिंगल जज के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। मार्च 2023 में सिंगल जज की बेंच ने CIC के उस निर्देश को रद्द कर दिया था, जिसमें गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। CIC का यह निर्देश वर्ष 2016 का था।
31 मार्च 2023 को केजरीवाल पर लगा था ₹25 हजार का जुर्माना
गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 31 मार्च 2023 को अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने आरटीआई के प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर उन्हें फटकार भी लगाई थी और उनके रवैये को कैजुअल (Casual) बताया था।
केजरीवाल की ओर से इसी फैसले को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की गई थी। अब डिवीजन बेंच ने उनकी अपील को खारिज करते हुए पहले लगाए गए जुर्माने को भी बरकरार रखा है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने केजरीवाल की ओर से रखी दलील
अपील पर सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील पेश की थी। उन्होंने केजरीवाल पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने का विरोध किया था।
वहीं गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि केजरीवाल ने इस मामले को लगातार आगे बढ़ाया और संस्था को बदनाम करने के लिए कई प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कीं।
2016 में केजरीवाल ने CIC को लिखी थी चिट्ठी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ा यह मामला वर्ष 2016 में सामने आया था। उस समय अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री की डिग्री को सार्वजनिक करने की मांग की थी।
अप्रैल 2016 में CIC ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद गुजरात यूनिवर्सिटी इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची। अदालत ने बाद में CIC के निर्देश को रद्द कर दिया था।
गुजरात यूनिवर्सिटी ने पीएम मोदी की डिग्री को लेकर क्या कहा था?
मई 2016 में गुजरात यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वाइस चांसलर एमएन पटेल ने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1983 में पॉलिटिकल साइंस में MA किया था। उनके अनुसार, एक्सटर्नल स्टूडेंट के तौर पर पीएम मोदी को 62.3 फीसदी अंक मिले थे।
गुजरात यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही CIC के आदेश को भी चुनौती दी थी। इसके बाद सिंगल बेंच ने CIC के निर्देश को रद्द कर दिया था।