उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में होटल व्यवसायी के बेटे विनीत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी कमलेश चौधरी के एनकाउंटर के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुठभेड़ को लेकर जहां समाजवादी पार्टी ने गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया है। इस बीच आरोपी के अंतिम संस्कार के दौरान हुए हंगामे और पुलिस पर पथराव ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
एनकाउंटर के बाद अब यह मामला कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक और जातीय बहस का विषय बन गया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
विनीत राय हत्याकांड से शुरू हुआ पूरा विवाद
गाजीपुर में 29 मई को कारोबारी विनीत राय की हत्या के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी।
इसके बाद कुछ ही दिनों में पुलिस ने मुख्य आरोपी कमलेश चौधरी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाया, जिससे मामला लगातार चर्चा में बना रहा।
जानिए पूरी घटना की टाइमलाइन
29 मई
होटल व्यवसायी के बेटे विनीत राय की हत्या हुई। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना और पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
30 मई
हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और जांच प्रक्रिया शुरू हुई।
2 जून
पुलिस ने मामले में वांछित आरोपियों पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया, ताकि उनकी गिरफ्तारी जल्द सुनिश्चित की जा सके।
3 जून
मुख्य आरोपी कमलेश चौधरी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया, जबकि बाद में इस कार्रवाई पर सवाल भी उठने लगे।
4 जून
कमलेश चौधरी के अंतिम संस्कार के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव और हमले की घटना सामने आई, जिसमें चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अंतिम संस्कार के दौरान हुए बवाल के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक Iraj Raja ने चेतावनी देते हुए कहा, “उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और हालात पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
समाजवादी पार्टी ने लगाए गंभीर आरोप
मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। सपा सांसद Virendra Singh ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म के आधार पर एनकाउंटर किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया, “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वालों को कमर के ऊपर गोली मारी जा रही है.”
सपा का कहना है कि कमलेश चौधरी पिछड़े वर्ग से संबंध रखता था और पार्टी से जुड़ा हुआ था, इसलिए उसे निशाना बनाया गया। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि मामले के अन्य आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
बीजेपी ने किया पलटवार
समाजवादी पार्टी के आरोपों पर भाजपा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता Anand Dubey ने कहा कि कमलेश चौधरी एक पेशेवर अपराधी था और उसके खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
उन्होंने कहा, “कमलेश चौधरी पेशेवर अपराधी था. उसके ऊपर कई गंभीर मामले पहले से दर्ज थे. एनकाउंटर किसी जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर हुआ है.”
भाजपा का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है और इसे जातीय रंग देना उचित नहीं है।
परिजनों ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप
कमलेश चौधरी के परिवार ने पुलिस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की है। परिजनों का दावा है कि घटना के समय कमलेश बिहार में मौजूद था और पुलिस उसे वहां से लेकर आई थी।
परिवार ने होटल व्यवसायी आलोक राय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आलोक राय का कटरा गैंग से संबंध है और उनके प्रतिष्ठान में अवैध गतिविधियां संचालित होती थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पथराव मामले में दर्ज हुआ मुकदमा
अंतिम यात्रा के दौरान पुलिस पर हुए हमले को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने छह नामजद आरोपियों और 40 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
प्रशासन का कहना है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।