
गाजियाबाद कीवेव सिटी के करीब 3 हजार आवंटियों के लिए अच्छी खबर है। बोर्ड बैठक में इसके संशोधित डीपीआर के लेआउट को मंजूरी मिलने के बाद यह योजना परवान चढ़ सकेगी। वहीं, वेव सिटी डेवलपर्स का दावा है कि लेआउट प्लान स्वीकृत होने के छह महीने के भीतर आवंटियों को भूखंड पर कब्जा देना शुरू कर दिया जाएगा।पिछले 12 साल से उत्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्रा. लि. गाजियाबाद (वेव सिटी) परियोजना में प्लॉट का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलने वाली है। वेव सिटी की संशोधित डीपीआर के लेआउट का प्रस्ताव 5 अगस्त को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। वेव सिटी ने 4196.30 एकड़ जमीन का संशोधित डीपीआर स्वीकृति करवाया था, लेकिन अब लेआउट 3786.79 एकड़ का पास करवाया जा रहा है। इससे करीब 3 हजार की संख्या में आवंटियों को फायदा मिलेगा, क्योंकि उन्होंने वेवसिटी के फेस-2 में प्लॉट बुक करवा रखे हैं। ऐसे में इसका संशोधित लेआउट स्वीकृत होने से इन आवंटियों को भी अपने प्लॉट पर कब्जा मिल सके। वेव सिटी के अधिकारियों का कहना है कि संशोधित लेआउट स्वीकृत होने के बाद फेस टू योजना पर तेजी से काम किया जाएगा, ताकि आवंटियों को जल्द से जल्द प्लॉट पर कब्जा दिया जा सके।
बता दें कि शासन ने वर्ष 2009 में 13 हाईटेक टाउनशिप का लाइसेंस दस साल के लिए दिया था। जब दस साल पूरे होने के बाद 2029 में इसका रिव्यू किया तो पता चला कि पूरे प्रदेश में सात हाईटेक टाउनशिप ही क्रियाशील मिली। बाकी छह के लाइसेंस को शासन ने निरस्त कर दिया।
जीडीए के सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वेव सिटी के संशोधित ले-आउट के परीक्षण कमेटी ने कर लिया है। अब संशोधित डीपीआर का लेआउट बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
बोर्ड बैठक में रखा जाएगा ले-आउट
कैग ऑडिट के दौरान वेव सिटी के भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की वसूली नहीं होने पर आपत्ति लगाई गई थी। इसमें प्राधिकरण को 401 करोड़ का नुकसान होने की बात कही गई थी। नवंबर 2020 से लेकर अब तक छह बार प्रस्ताव बना, लेकिन पास नहीं हुआ। मामला हाईपावर कमेटी पहुंचा, जहां से भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क के 401 करोड़ रुपये के एवज में इतनी कीमत की जमीन बैंक गारंटी के रूप में बंधक रखकर वेव सिटी की संशोधित डीपीआर 3786.79 एकड़ जमीन पर स्वीकृत की गई है। जल्द ले आउट बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।