तमिलनाडु की राजनीति में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद तेज होता नजर आ रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग उठाई है। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और कई प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक के दौरान पारित प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई। इसके साथ ही पार्टी ने SIR प्रक्रिया पर भी कड़ा विरोध जताया। DMK का आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी ने इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
SIR के खिलाफ छात्र संगठनों के प्रदर्शन को DMK का समर्थन
DMK ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों को समर्थन देने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
तमिलनाडु में SIR को लेकर पहले भी छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। अब DMK के समर्थन से इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। पार्टी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने की मांग कर रही है।
कांग्रेस और TVK पर भी DMK ने साधा निशाना
पार्टी सांसदों की बैठक में कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के रुख की भी आलोचना की गई। DMK ने दोनों राजनीतिक दलों पर SIR के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब SIR को लेकर DMK और कांग्रेस के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद देखने को मिल चुके हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच मतभेद बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, संबंधित दलों के रुख और आगे की राजनीतिक रणनीति पर स्थिति आने वाले दिनों में अधिक स्पष्ट हो सकती है।
राष्ट्रपति को याचिका सौंपेगी DMK, बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
DMK ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को दूर करने के लिए भारत के राष्ट्रपति को याचिका सौंपने का निर्णय लिया है। पार्टी की प्रमुख मांगों में SIR प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करना और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था बहाल करना शामिल है।
पार्टी का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सुधार की जरूरत है। राष्ट्रपति को याचिका सौंपने की तैयारी के जरिए DMK इन मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह संबंधित संवैधानिक और संस्थागत प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
क्या DMK बनाएगी नया तीसरा राजनीतिक मोर्चा?
चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच DMK के राष्ट्रीय स्तर पर अलग राजनीतिक मोर्चा बनाने की संभावनाओं पर विचार करने की खबरें भी सामने आई हैं। NDTV और DT Next की रिपोर्टों के मुताबिक, इस दिशा में CJP और कुछ क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यदि यह पहल आगे बढ़ती है, तो इसका असर विपक्षी दलों के मौजूदा गठबंधन और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित तीसरे मोर्चे का गठन कब होगा, इसमें कौन-कौन से राजनीतिक दल शामिल होंगे या इसकी औपचारिक रूपरेखा क्या होगी।
फिलहाल DMK ने SIR रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और बैलेट पेपर से मतदान बहाल करने जैसी मांगों के जरिए चुनाव सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर अन्य विपक्षी दलों और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का अहम हिस्सा बन सकती है।