कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों के समर्थन और तेलंगाना में उसके शासन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हैदराबाद में ऐतिहासिक चारमीनार पर ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उनके स्वयंसेवकों को रोका, उनसे पूछताछ की और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गई। कार्यकर्ताओं ने इस घटना को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जोड़ते हुए राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे राहुल गांधी
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं के मुताबिक, राहुल गांधी सभी विरोध प्रदर्शनों को समान लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखने की बात कर रहे हैं। इसी संदर्भ में स्वयंसेवकों ने सवाल उठाया है कि यदि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार माना जाता है, तो तेलंगाना में भी इस अधिकार का सम्मान क्यों नहीं किया जाना चाहिए?
CJP कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे चारमीनार पर शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपनी बात रखना चाहते थे। हालांकि, उनके अनुसार पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले गई। कार्यकर्ताओं ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के अधिकार से जुड़ा मामला बताया है।
तेलंगाना पुलिस की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार
इस घटना को लेकर तेलंगाना पुलिस की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किए जाने की बात कही गई है। पुलिस ने कथित तौर पर स्वयंसेवकों को रोके जाने और उनसे पूछताछ किए जाने के कारणों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि मार्च के दौरान किन परिस्थितियों में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और स्वयंसेवकों को पुलिस स्टेशन क्यों ले जाया गया। घटना के संबंध में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
CJP कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल
CJP से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करती है, लेकिन राज्य स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने की कार्रवाई होती है। कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी के कथित दोहरे रवैये से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि चारमीनार पर प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। ऐसे में वे जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर देने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ा। हालांकि, इस मामले में कांग्रेस और तेलंगाना पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े कार्यकर्ता
CJP कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प जताते हुए कहा कि उनके अधिकारों को सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल, चारमीनार पर मार्च से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक दलों के रुख और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है। मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने के लिए पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और घटना से संबंधित अन्य तथ्यों का सामने आना जरूरी है।