तब क्यों बदल जाता है नियम? उमर खालिद और सैफी के समर्थन में दिग्विजय सिंह का बयान

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सीएए-एनआरसी के विरोध में 4 साल से जेल में बंद मुस्लिम युवाओं के समर्थन में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि बेल नियम है और जेल अपवाद.

ऐसा क्यों होता है जब मुसलमानों की बारी आती है तो ये नियम बदल जाता है. उमर खालिद, खालिद सैफी जैसे लोग उस कानून का विरोध कर रहे थे, जिसकी (कानून) कोई जरूरत ही नहीं थी.

कांग्रेस नेता ने कहा, मैं ऐसी जगह से आता हूं, जिसे आरएसएस की नर्सरी कहा जाता है. संगठन से जुड़े कई लोगों से मित्रता रही है. मैं इन्हें अच्छी तरह से जानता हूं. इनका लोकतंत्र पर कोई भरोसा नहीं है. जो कोई भी मुसलमानों के पक्ष में बोलेगा, उसे ये राष्ट्रविरोधी कहते हैं. इनका मुखौटा हर चेहरे पर है. आरएसएस एक गैरपंजीकृत संगठन है.

ये लड़ाई हम सबको लड़नी पड़ेगी

उन्होंने कहा कि इसकी मेंबरशिप भी नहीं होती है. कोई अकाउंट नहीं है. कोई पकड़ा जाता है तो कहते हैं कि हमारा मेंबर नहीं है. जैसा नाथूराम गोडसे के वक्त किया था. ये लड़ाई हम सबको लड़नी पड़ेगी. मैं 10 साल तक मुख्यमंत्री रहा. एक भी केस न तो टाडा में दर्ज किया और न ही पोटा में.

बाबरी शहीद होने के बाद मैं सीएम बना

दिग्विजय सिंह ने कहा, बाबरी शहीद होने के बाद मैं सीएम बना था. हर 15-20 दिन में फसाद होते थे लेकिन मध्य प्रदेश मे कोई दंगा नहीं होने दिया. आज डबल इंजन सरकार की बुलडोजर संस्कृति से हम सबको लड़ना है. आरएसएस और मोदी की बीजेपी राजनीतिक हथियार के पीड़ित वो लोग हैं, जो जेल में बंद हैं.

RSS-BJP राजनीतिक षड्यंत्र कर रही

उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी एक राजनीतिक षड्यंत्र व्हाट्सएप/फेसबुक के जरिये फैला रही है. इसमें व्हाट्सएप/फेसबुक के कंट्री हेड भी शामिल हैं. षड्यंत्र ये कि 2045 तक मुस्लिम देश में बहुसंख्यक हो जाएंगे, ये संभव नहीं है. इस पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरेशी ने एक किताब भी लिखी है.

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