कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने हिरासत से बाहर आने के बाद रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले की गई कार्रवाई के दौरान पार्टी के सदस्यों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया। दास ने दावा किया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान कुछ सदस्यों के फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें आशंका है कि इन डिवाइस का डेटा एक्सेस करने, क्लोन करने या फोन हैक करने की कोशिश की गई हो सकती है।
सौरव दास ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के मुंबई समन्वयक प्रणय अहीरे के साथ हिरासत के दौरान हिंसा की गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। दास ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल जैसी स्थिति से करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी केवल अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ जंग लड़ रही है। उनके मुताबिक, दिल्ली में करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के कारण राजधानी किले जैसी बन गई है।
आंदोलन की छवि खराब करने की कोशिश का लगाया आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सौरव दास ने आरोप लगाया कि मेट्रो स्टेशनों, दुकानों और सड़कों को बंद करके आंदोलन की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, ’50 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन, दुकानें, और सड़कें बंद करके हमारे आंदोलन की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. वे जेनजी आंदोलन को गलत तरीके से हाइलाइट करना चाहते हैं. जब हम उतरे तो पुलिस तुरंत प्लेन की सीढ़ियों पर आ गई. हमें उठा ले गई. यह वही सरकार है, जिसने मोदी और विजय माल्या को प्लेन से विदेश भेजा था. हमें पता था कि हमें हिरासत में लिया जाएगा, लेकिन हमें इस तरह से उठाया गया.’
दास ने हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें कार्रवाई का कोई लिखित कारण नहीं बताया गया। उन्होंने कहा, ‘हमें हिरासत में लेने का कोई कागज या कारण नहीं बताया. उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल करके जबरदस्ती हमारे फोन जब्त कर लिए. हमने फिर भी अपने फोन दे दिए. जब्ती का मेमो मांगा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. वे हमें अलग-अलग प्राइवेट कारों में ले गए. मैं आरके पुरम में था. आशुतोष वल्लभगढ़ में थे. अभिजीत कहीं और थे. हमें वकील करने में कानूनी अधिकार है, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया.’
‘सरकार पूरी तरह से आपा खो चुकी है’, सौरव दास का दावा
CJP नेता ने सरकार पर युवाओं के सवालों से डरने और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए हिंसा का सहारा लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘सरकार पूरी तरह से आपा खो चुकी है. सब कुछ ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए जो नंबर 1 गद्दार हैं, सरकार डरी हुई है कि जागरूक युवा सवाल पूछेंगे. इसलिए वे हिंसा का सहारा ले रहे हैं. मैं युवाओं से सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अपील करता हूं. यह सिस्टम भ्रष्ट हैं. दो लोगों मोदी और शाह की सेवा के लिए चल रहा है. दिल्ली पुलिस ने हमें हिरासत में लेने का कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया. हमारे फोन जब्त कर लिए गए. हमें वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई.’
सौरव दास ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों को औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया और उन्हें वकील से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं मिली। हालांकि, ये सभी आरोप CJP नेता की ओर से लगाए गए हैं।
दक्षिणपंथी समूहों पर हिंसा भड़काने का आरोप
सौरव दास ने जंतर-मंतर पर कथित हिंसा को लेकर दक्षिणपंथी समूहों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। दास ने हिरासत में प्रणय अहीरे के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल किए।
उन्होंने दावा किया कि Gen Z आंदोलन को कवर करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को भी परेशान किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाएं हुईं और उनसे नेम टैग पहनने को कहा गया। दास ने इन घटनाओं को पत्रकारिता की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार पत्रकारिता के खिलाफ जंग लड़ रही है।
बंगला साहिब गुरुद्वारे को लेकर भी लगाए आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जूते और हथियारों के साथ गुरुद्वारे में दाखिल हुई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। दास के अनुसार, गुरुद्वारा प्रबंधन पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए दबाव डाला गया।
उन्होंने कहा, ‘दिल्ली पुलिस जूते और हथियारों के साथ जबरन बंगला साहिब में घुसी और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए मजबूर किया. इस सरकार का अत बहुत करीब है. मैं सिख भाइयों से हमारी मदद करने और उनके खिलाफ लड़ने का आग्रह करता हूं. हमारे देश में डर का माहौल है. यह सब एक व्यक्ति के लिए किया जा रहा है. ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए. मैं पूछना चाहता हूं कि ज्ञानेश खुमार के पास ऐसी क्या जानकारी है, कि सरकार उन्हें बचा रही है? क्या उन्हें 2024 के चुनावों के बारे में कुछ पता है?’
फोन हैक और क्लोन किए जाने की जताई आशंका
सौरव दास ने हिरासत के दौरान अपने कानूनी अधिकारों और जब्त किए गए मोबाइल फोन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि उनके फोन 25 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस के पास रहे और उन्हें जब्ती से संबंधित दस्तावेज नहीं दिए गए। दास ने आशंका जताई कि इस दौरान फोन का डेटा एक्सेस किया गया होगा या डिवाइस को हैक अथवा क्लोन किया गया हो सकता है।
उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। दास ने यह भी आशंका व्यक्त की कि फोन में मौजूद जानकारी के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है या उसमें सबूत रखे गए हों। उन्होंने इन आशंकाओं को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने और लंबे समय तक फोन पुलिस के पास रहने से जोड़कर देखा।
सौरव दास के बयान के बाद CJP के विरोध प्रदर्शन, हिरासत की प्रक्रिया, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और जब्त किए गए फोन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस पक्ष का जवाब इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।