
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ हमेशा आधुनिक तकनीकों के हिमायती रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर न्यायालय के कामों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वर्चुअल सुनवाई को लेकर जोर दिया है।गुरुवार को सीजेआई ने खुलासा किया कि कुछ राज्य के उच्च न्यायालय अभी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई सुनिश्चित कराने के बजाए इसे एक भोग-विलास की वस्तु मानते हैं। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर किए गए खर्च पर भी लोगों का ध्यान खींचा।
हाईकोर्ट के जजों पर भड़के सीजेई चंद्रचूड़
द हिंदू की रिपोर्ट की मानें तो सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “कुछ उच्च न्यायालय (वकीलों और वादकारियों को) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक प्रदान करने के लिए 48 घंटे की अग्रिम सूचना चाहते हैं। कुछ लोगों ने कहा है कि आपको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की लिंक तभी मिल सकता है जब आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो… लिंक कॉज-लिस्ट में होने चाहिए।” मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ की सुनवाई की शुरुआत में खुली अदालत में कहा कि किसी को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक के लिए दो दिन पहले आवेदन करने या 60 वर्ष से अधिक उम्र का होने के लिए क्यों कहा जाता है।
अदालतों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने पर जोर
देश के अदालतों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के प्रति किए गए खर्च का जिक्र करते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि उच्च न्यायालयों और जिला अदालत न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए नवंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच 850 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सीजेआई ने कहा, “उच्च न्यायालयों ने उस राशि का 94% खर्च किया। उम्मीद है, अब उच्च न्यायालयों में बुनियादी ढांचे को वास्तव में उन्नत किया जाएगा।”
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह पैसा न्यायपालिका को ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के लिए आवंटित 7 हजार करोड़ का हिस्सा था। सीजेआई ने कहा कि वर्चुअल सुनवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आपराधिक मुकदमों में होने वाली लंबी देरी को कम करने में मदद मिलेगी।