समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े जमीन विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मोहन यादव के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं और भाजपा तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी कर रही है।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। उन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के नेतृत्व को लेकर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए।
मोहन यादव के खिलाफ आरोपों को बताया साजिश
पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर ही उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
अखिलेश यादव ने कहा, “मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने साजिश की है.अगर मोहन यादव पर ये आरोप है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300-600 एकड़ जमीन ली है. ये कोई नई बात नहीं है. वे पहले रियल स्टेट का काम करते थे. क्या भाजपा ये नहीं जानती? ये आरोप इसलिए लग रहा है कि भाजपा रास्ता ढूंढ रही है कि 3 मुख्यमंत्री कैसे बदलें. वे मुख्यमंत्री बदलना चाहते हैं इसलिए आरोप लगवा रहे हैं.”
राजस्थान और यूपी के मुख्यमंत्री को लेकर भी किया दावा
सपा प्रमुख ने आगे दावा किया कि भाजपा की रणनीति सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक पार्टी राजस्थान और उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में भी बदलाव करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “इन्हें मध्य-प्रदेश, राजस्थान के मुख्यमंत्री को हटाना है. इन दो को इसलिए हटा रहे हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना है. ये हटाने की साजिश चल रही है.उत्तर प्रदेश की जनता जानती है कि इस बार साइकिल इतनी तेज चलेगी कि अपने आप मुख्यमंत्री हट जाएंगे.”
अलीगंज अग्निकांड पर सरकार को घेरा
लखनऊ के अलीगंज में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड पर भी अखिलेश यादव ने गहरा दुख जताया। उन्होंने हादसे के लिए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
अखिलेश ने कहा, “कल जो घटना हुई है वो दुखद है. इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की जान चली गई. सच्चाई ये है कि भ्रष्टाचार सभी मानकों के ऊपर है. भ्रष्टाचार से बनी सरकार ही भ्रष्टाचार कर रही है. उसी का परिणाम है कि जानें चली गई.”
उन्होंने सवाल उठाया कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं और संबंधित विभागों ने अनुमति किस आधार पर दी।
NOC और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे हादसे प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को उजागर करते हैं। उन्होंने पूछा कि सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना एनओसी कैसे जारी की गई।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
SIT जांच पर भी जताई नाराजगी
अलीगंज अग्निकांड की जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी अखिलेश यादव ने सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सरकार हर विवादित मामले में एसआईटी बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है।
उन्होंने कहा, “सरकार को बचाने का एक ही तरीका है SIT गठित कर दो. लग तो यही रहा है की 10 साल से कोई सरकार ही नहीं है.”
सपा प्रमुख ने मृतकों के परिवारों को दी गई आर्थिक सहायता को भी अपर्याप्त बताते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को और अधिक मदद मिलनी चाहिए।
राम मंदिर से जुड़ा मुद्दा भी उठाया
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने अयोध्या में राम मंदिर से कथित तौर पर 200 किलो चांदी की शिला गायब होने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही उन्होंने मंगलवार को आयोजित होने वाले भंडारे को लेकर कहा कि इस तरह की परंपरा मुख्य रूप से लखनऊ में देखने को मिलती है।
उनके बयान ऐसे समय में आए हैं जब प्रदेश में कई बड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।