22 साल बाद CBI को बड़ी सफलता! जाली पासपोर्ट मामले में गैंगस्टर छोटा राजन को 7 साल की सजा

करीब 22 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने गैंगस्टर छोटा राजन को जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में 7 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, छोटा राजन ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए ‘विजय कदम’ नाम से पासपोर्ट बनवाकर चेन्नई पासपोर्ट कार्यालय को धोखा दिया था।

फर्जी दस्तावेजों से बनवाया था पासपोर्ट

सीबीआई के मुताबिक, छोटा राजन ने स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और राशन कार्ड समेत अन्य फर्जी दस्तावेज जमा कर ‘विजय कदम’ के नाम से भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया था। जांच में यह भी सामने आया कि विजय कदम नाम से पासपोर्ट लेने वाला व्यक्ति वास्तव में मुंबई का रहने वाला राजेंद्र उर्फ नाना उर्फ छोटा राजन था।

2002 में दर्ज हुई थी FIR

इस मामले में सीबीआई ने 19 मार्च 2002 को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। करीब दो वर्ष की जांच के बाद एजेंसी ने 22 जनवरी 2004 को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

सीबीआई के प्रवक्ता के अनुसार, छोटा राजन फिलहाल नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है, जहां वह अन्य आपराधिक मामलों में पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहा है।

अदालत ने 7 साल की सजा और जुर्माना सुनाया

लंबी सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने जाली पासपोर्ट मामले में छोटा राजन को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कारावास और 55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला जांच एजेंसी के लिए दो दशक से अधिक समय तक चले मुकदमे में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

बाली एयरपोर्ट से हुई थी गिरफ्तारी

छोटा राजन को 25 अक्टूबर 2015 को इंडोनेशिया के बाली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। वह ऑस्ट्रेलिया जाने वाली फ्लाइट में सवार होने की तैयारी कर रहा था। उसके पास मौजूद पासपोर्ट पर ‘मोहन कुमार’ नाम दर्ज था, लेकिन पूछताछ के दौरान उसने अपना असली नाम राजेंद्र निकालजे बताया।

इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई पुलिस से मिली गुप्त सूचना के आधार पर इंडोनेशियाई अधिकारियों ने उसके फिंगरप्रिंट की जांच की, जिससे पुष्टि हुई कि वह भारत द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस वाला आरोपी छोटा राजन ही है।

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