केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कक्षा 6 के छात्रों को इस साल तीसरी भाषा की अनिवार्यता से राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBSE की तीन भाषा नीति की नई व्यवस्था 2027-28 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगी।
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा सत्र में कक्षा 6 में पढ़ रहे बच्चों को वही छूट दी जाएगी, जो अभी कक्षा 7 के छात्रों को मिल रही है। इसके तहत कक्षा 6 के विद्यार्थी तीसरी भाषा पढ़ेंगे, लेकिन उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। आगे चलकर जब ये छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब उन्हें तीसरी भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
2027-28 से लागू होगी Three Language Policy
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्पष्ट हो गया है कि CBSE की तीन भाषा नीति की नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इसका मतलब है कि अगले साल कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को दो भारतीय भाषाओं और एक विदेशी भाषा का अध्ययन करना होगा।
इस व्यवस्था में अंग्रेजी को विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में व्यवहारिक तौर पर ज्यादातर छात्रों के लिए अंग्रेजी के अलावा दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में नई व्यवस्था को लेकर छात्रों और स्कूलों के सामने आने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि नई नीति के कारण लाखों विद्यार्थियों के सामने अचानक तीसरी भाषा पढ़ने की जरूरत पैदा हो गई। कई स्थानों पर नई भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं होने और पर्याप्त शिक्षकों की कमी की बात भी अदालत के सामने रखी गई थी।
CJI सूर्य कांत की बेंच ने जताई थी चिंता
20 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने छात्रों को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई थी। उस समय कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस व्यवस्था को अगले वर्ष से लागू करने पर विचार करने का सुझाव दिया था।
सोमवार, 28 सितंबर को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने की व्यवस्था हो चुकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBSE के स्कूलों की बड़ी संख्या को देखते हुए 1 प्रतिशत स्कूल भी बड़ी संख्या में छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसके बाद अदालत ने तीन भाषा नीति को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का आदेश दिया। साथ ही मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी वर्तमान कक्षा 7 के विद्यार्थियों के समान राहत देने की बात स्पष्ट की गई।
CBSE ने R3 को लेकर क्या व्यवस्था बताई?
CBSE की ओर से पहले कक्षा 7 और 8 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए छूट की व्यवस्था स्पष्ट की गई थी। इसके अनुसार यदि कोई छात्र पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच, पढ़ रहा है तो वह इन्हें जारी रखते हुए एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा यानी R3 के तौर पर ले सकता है।
मौजूदा कक्षा 7 से 10 के छात्रों के लिए R3 की कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी और इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद यही व्यवस्था इस साल कक्षा 6 में पढ़ रहे बच्चों पर भी लागू होगी।
R3 में असफल होने पर भी कक्षा 10 में प्रमोशन
CBSE ने अपने हलफनामे में R3 के आंतरिक मूल्यांकन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। इसके मुताबिक कक्षा 9 में R3 के आंतरिक मूल्यांकन में सफल नहीं होने वाले छात्रों को भी कक्षा 10 में प्रमोट किया जाएगा।
ऐसे छात्रों को R3 के आंतरिक मूल्यांकन में दोबारा पास होने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में सफल होने के लिए स्कूल की ओर से जारी R3 पास सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से फिलहाल कक्षा 6 में पढ़ रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को तीसरी भाषा की नई व्यवस्था को लेकर राहत मिली है। वहीं नई तीन भाषा नीति की व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होने के कारण स्कूलों को भी तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।