
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार शाम को आईआरएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार सिंघल को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी फूड फ्रैंचाइज़ी चेन “ला पिनोस” के मालिक सनम कपूर की शिकायत पर की गई, जिन्होंने सिंघल पर आयकर नोटिस को खत्म करने के बदले 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
45 लाख रुपये की रिश्वत की मांग
सीबीआई की जांच के अनुसार, सिंघल ने दिल्ली स्थित अपने आवास से बिचौलिए के माध्यम से सनम कपूर से 45 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। कपूर ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके व्यवसाय को आयकर नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा था, जिससे उनकी व्यवसायिक स्थिति प्रभावित हो रही थी।
सनम कपूर का कहना था कि यह उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब उन्हें जानकारी मिली कि उनके व्यापारिक साझेदार हर्ष कोटक ने कच्चा माल सस्ते दामों पर खरीदना शुरू कर दिया था, जिससे उनका समझौता उल्लंघित हो रहा था। इसके बाद, उन्हें 1.6 करोड़ रुपये में फ्रैंचाइज़ी वापस खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जो मूल कीमत से छह गुना अधिक था।
कारोबारी विवाद और आयकर नोटिस
सनम कपूर के अनुसार, जब उन्हें पता चला कि हर्ष कोटक ने समझौते के नियमों का उल्लंघन किया है, तब उन्हें आयकर और खाद्य सुरक्षा विभाग से कई नोटिस मिलने लगे। आरोप है कि सिंघल ने इन नोटिसों को “बंद” करने के लिए 45 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। इस पर कपूर ने सीबीआई से संपर्क किया और मामले की शिकायत की।
सीबीआई का ऑपरेशन: रंगे हाथ गिरफ्तार
30 मई को, हर्ष कोटक ने चंडीगढ़ में सनम कपूर से मुलाकात की और अगले दिन सिंघल के मोहाली स्थित आवास पर बुलाया। सीबीआई ने जाल बिछाया और 31 मई को कोटक को गिरफ्तार किया, जब उसने कपूर से 25 लाख रुपये की रिश्वत ली।
यह गिरफ्तारी सीबीआई के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इस मामले में एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी के शामिल होने से यह मामला और भी गंभीर हो गया है। अब सीबीआई आगे की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
सीबीआई की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। सिंघल की गिरफ्तारी से यह संदेश गया है कि कानून से कोई ऊपर नहीं है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।