9 राज्यों पर भारी है अकेली मुंबई का बजट, एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका के पास है कुबेर का खजाना

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। राष्ट्रीय पार्टियों से लेकर क्षेत्रीय दल तक इस चुनाव को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बीएमसी की आर्थिक ताकत है। यह न केवल भारत बल्कि एशिया की सबसे अमीर और धनी नगरपालिका मानी जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीएमसी का सालाना बजट इतना विशाल है कि इसके सामने देश के कई राज्य भी बौने नजर आते हैं।

हिमाचल और गोवा जैसे 9 राज्य भी हैं पीछे

मुंबई नगर निगम के खजाने की तुलना अगर भारतीय राज्यों से करें तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बीएमसी का बजट लगभग 74,427 करोड़ रुपये (करीब 8.9 अरब डॉलर) रखा गया है। यह राशि भारत के 9 राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर, मिजोरम का बजट महज 15,043 करोड़ रुपये है, जो बीएमसी के बजट का एक तिहाई भी नहीं है। इसके अलावा सिक्किम (16,196 करोड़), नागालैंड (24,699 करोड़), मणिपुर (29,988 करोड़), मेघालय (30,003 करोड़), त्रिपुरा (32,423 करोड़) और अरुणाचल प्रदेश (39,842 करोड़) जैसे राज्य मुंबई नगर निगम से काफी पीछे हैं। यहां तक कि गोवा (28,162 करोड़) और हिमाचल प्रदेश (58,514 करोड़) जैसे बड़े राज्यों का बजट भी बीएमसी से कम है।

9 साल में तीन गुना बढ़ा खजाना

बीएमसी की संपत्ति में पिछले एक दशक में जबरदस्त इजाफा हुआ है। साल 2017-18 में निगम का बजट 25,141.51 करोड़ रुपये था, जो साल-दर-साल बढ़ता गया। 2022-23 में यह 45,949 करोड़ रुपये तक पहुंचा और 2024-25 में 59,954 करोड़ रुपये हो गया। इस साल यानी 2025-26 में इसमें भारी उछाल आया है और यह 74,427.41 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह निरंतर वृद्धि मुंबई की आर्थिक क्षमता को दर्शाती है।

दिल्ली और बेंगलुरु भी टिकते नहीं सामने

अगर देश के अन्य महानगरों से तुलना करें तो बीएमसी का वर्चस्व साफ दिखाई देता है। देश की राजधानी दिल्ली की एमसीडी (MCD) का 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट 16,530 करोड़ रुपये है, जो मुंबई के बजट का एक छोटा हिस्सा भर है। वहीं, बेंगलुरु के निकाय का बजट भी मुंबई के मुकाबले काफी कम है। यही कारण है कि बीएमसी चुनाव को ‘मनी पावर’ का चुनाव भी कहा जाता है और हर दल इस ‘कुबेर के खजाने’ की चाबी अपने पास रखना चाहता है।

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