मुखिया को मिलेगी बंदूक? विधानसभा में गूंजा हत्या का मामला, सम्राट चौधरी ने जारी किया ये बड़ा फरमान

बिहार में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मुखिया की सुरक्षा और हथियार लाइसेंस का मुद्दा गरमा गया है. सोमवार (09 फरवरी, 2026) को बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह मामला जोर-शोर से उठाया गया. बेगूसराय सदर के विधायक कुंदन कुमार ने सदन में अपने क्षेत्र के एक मुखिया की हत्या का हवाला देते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की. इस पर गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा एक्शन लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं.

सिफारिश करते रहे और मुखिया की हत्या हो गई

विधायक कुंदन कुमार ने सदन में परना पंचायत के दिवंगत मुखिया वीरेंद्र शर्मा का जिक्र करते हुए प्रशासन की लापरवाही उजागर की. उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, “हम लोग लाइसेंस के लिए सिफारिश करते रहे और अंत में उनकी हत्या हो गई… वो क्षेत्र के युवा फेस थे.” उन्होंने सरकार से मांग की कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए. कुंदन कुमार ने आगे कहा, “मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसा आदेश दिया जाए कि अगर कोई विधायक सिफारिश करता है तो उसको तो कम से कम प्राथमिकता के आधार पर लाइसेंस दे दिया जाए.” दिनारा विधायक आलोक कुमार सिंह ने भी शिकायत की कि लाइसेंस के आवेदन एक साल से ज्यादा समय तक लटके रहते हैं.

सम्राट चौधरी का आदेश- 60 दिन में निपटाएं फाइल

विधायकों की नाराजगी और मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत बड़ा फैसला लिया. उन्होंने सदन में आश्वासन देते हुए कहा, “मांग वाजिब है. मैं निर्देश देता हूं कि 60 दिनों का समय होता है… गृह विभाग सभी जिलाधारियों को पत्र जारी कर कहेगा कि ऐसे मामलों का निष्पादन 60 दिनों के अंदर कर दिया जाए.” इस आदेश के बाद अब डीएम को हथियार लाइसेंस की फाइलों को ज्यादा दिन तक अटकाने की छूट नहीं मिलेगी.

महज 18 वोटों की रंजिश में गई थी जान

जिस मुखिया वीरेंद्र शर्मा की हत्या का जिक्र सदन में हुआ, उनकी कहानी बेहद खौफनाक है. 02 फरवरी 2023 को वीरेंद्र शर्मा की हत्या कर दी गई थी. इसकी वजह चुनावी रंजिश थी. वीरेंद्र शर्मा ने अपने प्रतिद्वंद्वी मो. महफूज अंसारी को महज 18 वोटों से हराया था. महफूज 2006 में भी हारा था, 2011 में जीता, लेकिन 2016 और 2020 में लगातार वीरेंद्र शर्मा से हार गया. लगातार दो हार वह बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने हत्या की सुपारी दे दी थी.

मोहाली से पकड़ा गया था शूटर

इस हत्याकांड के बाद मुख्य शूटर फरार हो गया था. पुलिस को उसे पकड़ने में तीन हफ्ते लग गए थे. एसटीएफ और जिला पुलिस के दबाव के कारण शूटर दिल्ली से भागकर पंजाब चला गया था. अंत में उसे मोहाली के एक पीजी (Paying Guest) से गिरफ्तार किया गया. बेगूसराय में मुखिया की हत्या का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले 2017 में मटिहानी के रामदीरी पंचायत के मुखिया मुन्ना सिंह की भी अपराधियों ने हत्या कर दी थी.

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