बांग्लादेश संकट

बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास पर हमला बोल दिया है. पिछले काफी वक्त से देश भर में प्रदर्शनों का दौर चल रहा था। आइए जानते हैं विवाद की वजह। बांग्लादेश में लंबे समय से चल रहा प्रदर्शनों के दौर ने सोमवार को नाटकीय मोड़ ले लिया। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और एक विशेष विमान से वह लंदन के लिए रवाना हो गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने पीएम हाउस को चारों ओर से घेर लिया था और कुछ लोग अदंर भी घुस गए. पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से देश भर में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शनों का दौर जारी है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस हिंसा को भड़काने के पीछे पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई का हाथ है। असल मे विवाद की जड़. यह है की बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर बवाल इतना बढ़ गया कि आखिरकार सरकार का ही तख्ता पलट हो गया है. 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के लिए लड़ने वालों स्वतंत्रता सेनानियों के रिश्तेदारों को 30 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था. 2018 में इसे खत्म कर दिया गया, लेकिन कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताते हुए फिर से लागू करने का आदेश दिया था. इसके बाद पूरे देश में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था.। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि यह आरक्षण भेदभाव भरा है और इसका फायदा अवामी लीग से जुड़े लोगों को होगा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में छात्र और प्रदर्शनकारी संगठन सड़कों पर उतर गए। इसके बाद ढाका में कर्फ्यू लगाने के साथ ही इंटरनेट शटडाउन कर दिया गया था. स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, लेकिन प्रदर्शन नहीं रुका। इन हिंसक प्रदर्शनों में 300 से ज्यादा लोगों की जान गई है। बांग्लादेश में फैली हिंसा के पीछे पाकिस्तान का भी हाथ बताया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी, इंटर सर्विस इंटेलीजेंस ने बांग्लादेश में ‘छात्र शिविर’ नाम के छात्र संगठन को भड़काने का काम किया है। यह छात्र संगठन बांग्लादेश में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी की शाखा है। सोमवार, 5 अगस्त को आकिरकार विरोध-प्रदर्शन देखने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अब वह देश छोड़कर जा चुकी हैं. सेना ने जल्द ही अंतरिम सरकार गठन की बात कही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में अंतरिम सरकार का गठन हो जाएगा, लेकिन सत्ता सेना के पास रहेगी या सरकार के पास, इसका फैसला आने वाले कुछ समय में ही होगा। भारत के लिए यहां से पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है।

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