असम और बंगाल में भी हो सकती है उथल-पुथल, बांग्लादेश को लेकर चिंतित CM हिमंत शर्मा

सम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चिंता जताई है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हिंसक तरीके से सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद बांग्लादेश एक बार फिर भारत के पूर्वोत्तर से आए उग्रवादियों का सुरक्षित ठिकाना बन सकता है।सरमा ने मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में हसीना की अवामी लीग पार्टी का समर्थन करने वाले हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 2041 के बाद पड़ोसी असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण इसी तरह की उथल-पुथल पैदा हो सकती है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश में स्थिति पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आशंका जताई कि पड़ोसी देश फिर से उग्रवादियों का केंद्र बन सकता है और वहां से लोग अवैध रूप से (पूर्वोत्तर) क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। शर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि केंद्र बांग्लादेश की नयी सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा तथा पूर्वोत्तर राज्यों की चिंता उसकी बातचीत के एजेंडे में ऊपर रहेगी।

मुख्यमंत्री ने डेरगांव में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ”हम बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रम से चिंतित हैं और यदि समस्या जारी रही तो हमें डर है कि इसका इस क्षेत्र पर दो तरह से असर पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा की सुरक्षा की जानी चाहिए क्योंकि ”पड़ोसी देश के लोग भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से इस क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास कर सकते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, ”शेख हसीना के शासनकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र के उग्रवादियों को बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। हमारे लिए यह चिंता का विषय होगा कि कहीं पड़ोसी देश फिर से उग्रवादियों का गढ़ न बन जाए।” उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूर्ववर्ती बांग्लादेश सरकार के सहयोग से ”हम पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि पड़ोसी देश की नयी सरकार भी इस सहयोग को बनाए रखेगी।”

बांग्लादेश में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 440 हो गयी। स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी। मुख्यमंत्री ने इससे पहले दिन में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,”इस अनिश्चित समय में, जब हम बांग्लादेश से लगी अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, मेरा ध्यान अक्सर भविष्य के असम-2041 की ओर जाता है।”

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