सरकार को टिकाए रखने वाला बजट

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा सातवीं बार पेश किया गया। वर्ष 2024-25 का बजट में बेशक देश की आर्थिकी के विकास को आगे बढ़ाने वाला दूरगामी बजट है, लेकिन आम लोगों को बजट से तत्काल बड़ी राहत की जो उम्मीदें थीं, वह नदारद हैं। पहली नजर में यह साफ है कि मोदी सरकार की प्राथमिकता अपनी गठबंधन सरकार को बचाए रखने की है।दरअसल, पहली नजर में यह साफ है कि मोदी सरकार की प्राथमिकता अपनी गठबंधन सरकार को बचाए रखने की है, जिस तरह जदयू और टीडीपी की बैसाखियों पर यह एनडीए सरकार चल रही है, उसके चलते बिहार और आंध्र प्रदेश पर मेहरबानी होना स्वाभाविक ही था। हालांकि, मोदी सरकार ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू द्वारा उनके राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग ठुकरा दी है, लेकिन वो समर्थन के बदले केन्द्र से ज्यादा हिस्सेदारी मांगते और लेते रहेंगे, यह तय है।हैरानी की बात यह है कि इस साल जिन चार राज्यों महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने हैं, उन्हें भी बजट में कुछ खास नहीं दिया गया है। लेकिन दीर्घकालीन विकास की दृष्टि से देखें तो यह बजट विकास की बुनियाद को मजबूत करने तथा उसी दिशा में आगे बढ़ने के संकल्प से प्रेरित है।इस बजट से यह राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट है कि मोदी सरकार को अपनी मजबूती पर पूरा भरोसा है। साथ ही उसे इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीतने के लिए किसी लोकलुभावन टोटके की गरज नहीं है। अब यह मोदी सरकार का आत्मविश्वास है अथवा अति आत्मविश्वास, यह तो विस चुनाव नतीजों से पता चल जाएगा।पूरे बजट को अगर राजनीतिक नजरिए से देखें तो मोदी सरकार 3.0 के बजट में वित्त मंत्री ने लोकसभा चुनाव का नरेटिव बदलने वाले मुख्य मुद्दे जैसे कि बेरोजगारी, महंगाई व किसानों की समस्या आदि को एड्रेस तो किया है, लेकिन आराम के साथ और वो भी कुछ घुमा फिरा कर। बेरोजगारी की बात करें तो वित्त मंत्री एक भी ऐसी घोषणा नहीं की, जिससे यह संदेश जाए कि खुद सरकार बड़े नियोक्ता के रूप में सामने आना चाहती है। इस मामले में ज्यादातर भरोसा निजी क्षेत्र और स्वरोजगार पर जताया गया है।सरकार बड़ी 500 कंपनियों में इंटर्न शिप करने वाले युवाओ को पांच हजार रुपये का मासिक भत्ता देगी। लेकिन कितनी कंपनियां अनिवार्य रूप से इंटर्न रखेंगी और कितने इंटर्न रखेंगी, इसका कोई रोड मैप वित्त मंत्री ने नहीं दिया है। किसानों की बात है तो बजट में कृषि और उससे जुड़े सेक्टरों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई है। लेकिन किसानों की एमएसपी को कानूनी आधार देने की मांग का कोई जिक्र नहीं है। यहां तक कि किसान सम्मान निधि भी नहीं बढ़ाई गई है।मोदी सरकार का एक बड़ा समर्थक देश का मध्यम वर्ग रहा है। लेकिन बजट में आयकर छूट व स्टैंडर्ड डिडक्शन वृद्धि के रूप में ऊंट के मुंह में जीरे जैसी राहत दी गई है। क्योंकि जो टैक्स स्लैब बनाए गए हैं, वो इतने छोटे हैं कि एक वेतन वृद्धि और डीए में ही स्लैब बदल सकता है।न्यू टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है। साथ ही न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है। वित्त मंत्री का दावा है कि इससे 10 लाख रुपये से ज्यादा वेतन पाने वालों को सालाना 17,500 रुपये तक की बचत होगी। लेकिन पुराने टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।कुलमिलाकर मोदी सरकार यह मान कर चल रही है कि दो नेताओं को साधने से पूरी सरकार पांच सालों के लिए सध जाएगी। इसमें यह अतिआत्मविश्वास भी छिपा है कि जनता उसे आजादी की शताब्दी मनने तक भाजपा ही सत्ता में बनाए रखेगी।

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