UP Politics News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार की नाराजगी की चर्चा जोर पकड़ रही है. सवाल उठ रहा है कि क्या आजम परिवार अब सपा का दामन छोड़ किसी और पार्टी का रुख करेगा?
जेल से बाहर आने में अब भी समय लगेगा
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान को कई मामलों में जमानत दे दी है, लेकिन वह अभी भी सीतापुर जेल से बाहर नहीं आ पाए हैं. वजह है कि रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर शत्रु संपत्ति केस में तीन नई धाराएं जोड़ दी हैं, जिससे उनकी रिहाई में अड़चन आ गई है।
अखिलेश यादव से नाराज आजम परिवार
चर्चा है कि आजम खान के परिवार की नाराजगी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार, अब्दुल्लाह आजम अखिलेश यादव से खफा हैं, हालांकि किसी बड़े कदम का फैसला आजम खान की जेल से रिहाई के बाद ही होगा। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने पार्टी के एक सांसद और एक विधायक को आजम परिवार से संवाद कायम रखने की जिम्मेदारी दी है ताकि सैफई और आजम खान परिवार के रिश्तों में खटास न बढ़े।
बसपा और कांग्रेस से भी बढ़े संपर्क
सूत्रों का दावा है कि प्रियंका गांधी ने हाल ही में आजम परिवार से फोन पर बातचीत की थी। इसके अलावा कांग्रेस और बसपा समेत कई पार्टियों के नेताओं से भी लगातार संपर्क बना हुआ है। हालांकि, आजम खान की पत्नी डॉ. ताजीन फातिमा या बेटे अब्दुल्लाह आजम की किसी बड़े नेता से सीधी मुलाकात की पुष्टि नहीं हुई है।
सपा और आजम खान का पुराना रिश्ता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा और आजम खान का रिश्ता गहरा है, और उनके पार्टी छोड़ने की संभावना बेहद कम है। पहले भी जब आजम खान सपा से निकाले गए थे, तब भी उन्होंने दूसरे दलों से मिले बड़े ऑफर ठुकरा दिए थे और बाद में सपा में वापसी की थी।
अब्दुल्लाह आजम की चिंता
इस बार हालात अलग बताए जा रहे हैं। अब्दुल्लाह आजम सक्रिय राजनीति में हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि सपा में उनके पिता जैसा सम्मान मिलना मुश्किल है। यही वजह है कि जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अखिलेश यादव से दूरी बनाई हुई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बार अगर कोई फैसला हुआ तो उसमें अब्दुल्लाह की भूमिका अहम रहेगी।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आजम खान जेल से बाहर आने के बाद क्या रुख अपनाते हैं—क्या वह सपा में बने रहेंगे या कोई नया राजनीतिक सफर शुरू करेंगे।