
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। वहीं जब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कदम को संवैधानिक करार दे दिया तो पाकिस्तान से रहा नहीं गया। पाकिस्तान ने कहा था कि यह एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है और इसका समझौता यूएनएससी के प्रस्तावों के मुताबिक होना चाहिए।भारत को इसपर अकेले निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। अब इस मामले में चीन की भी प्रतिक्रिया सामने आ गई है। चीन ने भी पाकिस्तान का ही पक्ष खींचते हुए कहा कि इस विवाद का हल भारत और पाकिस्तान को आपस में मंत्रणा करके निकालना चाहिए।बता दें कि पाकिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की निंदा की थी। जब इस मामले में चीन के विदेश मंत्रीलय से सवाल कियागया तो प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, कश्मीर के मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट और स्थायी है। कश्मीर का मुद्दा यूएन चार्टर के हिसाब से यूएनएससी के प्रस्तावओं और द्विपक्षीय समझौते के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए।निंग ने कहा, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों पार्टियों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए और इस मामले का हल निकालना चाहिए। पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रालयों की तरफ से दिए गए इन बयानों पर भारत की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि भारत पहले ही कह चुका है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इससे संबंधित फैसले लेना भारत का आंतरिक मामला है। इसमें किसी और देश को दखल देने की जरूरत नहीं है। केंद्र ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर इसे दो भागों में बांट दिया था।
इसके बाद से ही पाकिस्तान भारत सरकार के फैसले को गलत बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर पर भारत के संविधान को नहीं मानता है। बता दें कि पाकिस्तान और चीन एक दूसरे के सदाबहार दोस्त हैं। वहीं एलएसी पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प होने के बाद दोनों देशों के संबंध और भी तनावपूर्ण चल रहे हैं।