हमारे साथ आजाद हुए देशों में लोकतंत्र सफल नहीं हुआ… संविधान पर चर्चा में बोले अमित शाह

राज्यसभा में मंगलवार को संविधान पर चर्चा का आखिरी दिन है.राज्यसभा में संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने के अवसर पर संविधान पर चर्चा कराई जा रही है. इसी चर्चा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी राज्यसभा में अपनी बात रख रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर एक अहम बात कही कि हमारे साथ कई देश आजाद हुए लेकिन उनमें से कई देशों में लोकतंत्र सफल नहीं हुआ. आगे उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र पाताल की गहराई तक पहुंचा है.आगे उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र पाताल की गहराई तक है. इसके साथ ही शाह ने कहा कि अब ये भी साफ हो गया है कि जब जब जनता ने किसी पार्टी को जनादेश दिया तो उसने सम्मान किया या नहीं किया. गृहमंत्री ने इस चर्चा को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया. इसके साथ ही उन्होंंने कहा कि देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अनेक तानाशाहों का अभिमान चूर-चूर करने का काम किया है. भारत का लोकतंत्र न केवल जीवंत है, बल्कि यह हर चुनौती के सामने और मजबूत हुआ है.
कानूनी दस्तावेज नहीं, भावना का प्रतिबिंबि…
शाह ने कहा कि हमारा संविधान न केवल एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि यह भारतीयता की भावना को प्रतिबिंबित करता है. उन्होंने कहा, “अगर पढ़ने का चश्मा विदेशी है, तो संविधान में भारतीयता नजर नहीं आएगी.” उन्होंने संविधान में अलग-अलग धर्मों के देवताओं के चित्रों का उल्लेख करते हुए इसे भारतीय जीवन के उद्घोष का प्रतीक बताया.
गृह मंत्री ने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद की भविष्यवाणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसे उन्होंने बहुत पहले देखा था. वहीं शाह ने देश की एकता और अखंडता का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को देते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों के कारण भारत एकजुट है.
युवा पीढ़ी के लिए जरूरी है ये चर्चा
आगे उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ, तब दुनियाभर के कई लोगों ने कहा था कि यह देश बिखर जाएगा, लेकिन आज भारत की एकता और आत्मनिर्भरता ने उन्हें गलत साबित कर दिया. संविधान पर चर्चा को उन्होंने जनता और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया. उन्होंने कहा कि इस चर्चा से यह समझने में मदद मिलेगी कि संविधान की भावनाओं को नजरअंदाज करने पर क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं.

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