उत्तर प्रदेश में ‘बुलडोजर एक्शन’ को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रदेश में जारी दंडात्मक कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने आज (बुधवार) एक बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी.
‘बिना कोर्ट के आदेश के नहीं गिरेगा कोई घर’
हमीरपुर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डबल बेंच ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कानून के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन कोर्ट के अगले ऑर्डर के बिना उनकी प्रॉपर्टी को गिराया नहीं जाएगा.” कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर नाराजगी
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत के रोक के बावजूद राज्य में इमारतों को गिराने की दंडात्मक कार्रवाई जारी है, जो सही नहीं है. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “इमारतों को सजा के तौर पर तोड़ना शक्तियों के बंटवारे (Separation of Powers) का उल्लंघन है, क्योंकि सजा देने का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका के पास है, कार्यपालिका के पास नहीं.”
हमीरपुर के फैमुद्दीन ने लगाई थी गुहार
यह पूरा मामला हमीरपुर के फैमुद्दीन और दो अन्य लोगों की याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं ने अपनी संपत्तियों को बुलडोजर एक्शन से बचाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनके वकील ने कोर्ट में सप्लीमेंट्री एफिडेविट फाइल किया, जिसे रिकॉर्ड पर ले लिया गया है. इससे पहले 21 जनवरी को भी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ जारी रहने पर तल्ख टिप्पणी की थी.
अब 25 फरवरी को होगी सुनवाई
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अपनी संपत्तियों के संभावित विनाश को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. अब 25 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रशासन संबंधित संपत्तियों पर बुलडोजर नहीं चला सकेगा.