जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की हिरासत रद्द होने और जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि वांगचुक को जेल भेजा ही क्यों गया, जबकि उनके आंदोलन को समर्थन मिलना चाहिए था।
बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप
अखिलेश यादव ने कहा,
”बीजेपी ने ही आश्वासन दिया था कि उन्हें स्टेटहुड का पूरा दर्जा मिलेगा. स्टेटहुड की पूरी पावर मिलेंगी लेकिन बीजेपी ने उनके साथ धोखा किया. न सिर्फ जनता को धोखा दिया बल्कि वांगचुक के साथ भी ऐसा व्यवहार किया और उन्हें जेल में जाना पड़ा.”
उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर उठाई गई आवाज लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा थी और सरकार को इसे सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए था।
कब और क्यों हुई थी गिरफ्तारी?
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। उन पर प्रदर्शन भड़काने के आरोप लगाए गए थे।
इन प्रदर्शनों में 22 पुलिसकर्मियों समेत 45 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था।
कब हुई रिहाई?
हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा करने के बाद केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया। रातानाडा थाना प्रभारी दिनेश लखावत ने बताया,
”केंद्र सरकार के आदेश के बाद वांगचुक को आज दोपहर करीब 1:30 बजे जेल से रिहा कर दिया गया.”
रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो भी जेल परिसर में मौजूद रहीं।
राजनीतिक बहस हुई तेज
वांगचुक की रिहाई के बाद विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि उस समय लिया गया फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से था। इस मुद्दे ने एक बार फिर लद्दाख की राजनीतिक स्थिति और संवैधानिक मांगों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।