लोकसभा चुनाव से पहले पुराने नेताओं की सेकेंड लाइन तैयार कर रहे अखिलेश,

खिलेश यादव ने अपनी पार्टी में प्रमुख नेताओं की सेंकेंड लाइन तैयार करनी शुरू कर दी है। दूसरी पांत के प्रमुख नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जा रही है। चाहे वह किरनमय नंदा हों या शिवपाल यादव, नरेश उत्तम या फिर स्वामी प्रसाद मौर्य।

मिशन 2024 के लिए इंडिया गठबंधन में अब अखिलेश यादव की भूमिका अहम है और उनके विभिन्न राज्यों में दौरे भी लगने हैं।

इस नाते अखिलेश ने मजबूत उम्मीदवारों के चयन, बूथ मैनेजमेंट, वोटर लिस्ट दुरुस्त करवाना, चुनाव मैनेजमेंट जैसे अहम कामों के लिए जिम्मेदारी सौंपना शुरू कर दिया है। असल में मुलायम सिंह यादव ने सपा के अध्यक्ष रहते हुए अपने अलावा कई प्रमुख नेताओं को आगे बढ़ाया और क्षेत्रीय क्षत्रपों को तैयार किया था। अब उसी राह पर अखिलेश ने चलना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते अखिलेश यादव की अब इंडिया गठबंधन में भूमिका बढ़ने वाली है। इसलिए यूपी में गठबंधन में समन्वय का काम तो वह खुद देखेंगे और सबसे बड़े स्टार प्रचारक भी वह खुद होंगे लेकिन अन्य कामों के जरिए दूसरे नेताओं को उभारा जा रहा है और उन्हें सामने लाया जा रहा है।

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा को अखिलेश ने लोकसभावार सीटों पर जीत की संभावनाएं तलाशने व प्रत्याशी चयन के लिए फीडबैक लेने का जिम्मा दिया है। नंदा नियमित रूप से पार्टी कार्यालय में लोकसभा वार पार्टी पदाधिकारियों व उस जिले के विधायकों संग बैठक कर वहां के लोगों से बात कर निर्देश दे रहे हैं। इसमें बूथमैनेजमेंट भी शामिल है। वैसे तो प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के जिम्मे कई काम हैं। इनमें प्रत्याशियों को सिंबल बांटने का काम भी है। पर वह वोटर लिस्ट दुरुस्त करवाने के लिए पूरे प्रदेश संगठन को सक्रिय करने में लगे हैं। चुनाव आयोग से मिल कर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों व मतदान के दौरान धांधली की शिकायत करने का काम उनके जिम्मे है। इस काम में प्रदेश सचिव केके श्रीवास्तव को लगाया गया है।

स्वामी प्रसाद को लेकर संतुलन बनाने में लगे हैं अखिलेश

स्वामी प्रसाद मौर्य भले ही विवादित बयानबाजी करते रहे हों, लेकिन वह सपा के ‘पीडीए’ फार्मूले को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस मामले में अखिलेश यादव ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। पार्टी के सवर्ण नेताओं को साधने के साथ वह स्वामी प्रसाद मौर्य को भी बराबर की अहमियत दे रहे हैं। गैर-यादव पिछड़ों की सियासत में स्वामी प्रसाद मौर्य हालांकि पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे लेकिन सपा ने उन्हें एमएलसी बना कर उनकी अहमियत बनाए रखी है।

चुनाव प्रबंधन संभालेंगे शिवपाल

शिवपाल यादव ने जिस तरह घोसी उपचुनाव में चुनाव मैनेजमेंट संभाला और वहां शानदार जीत हासिल हुई, उससे अब शिवपाल यादव की अहमियत भी सामने आ गई है। चुनाव जीतने के बाद भी वह पार्टी के पक्ष में अफसरों से जूझते दिखते हैं। सपा में बसपा से पिछड़े वर्ग के लालजी वर्मा, राम अचल राजभर व दलित नेता इंद्रजीत सरोज को भी जल्द नई जिम्मेदारी मिलेगी। पार्टी ने राष्ट्रीय कमेटी व प्रदेश कमेटी बना दी है। यही नहीं ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत बनी विभिन्न कमेटियों में अखिलेश ने अपने कई नए व पुराने नेताओं को शामिल किया कर आगे बढ़ा रहे हैं।

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