
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने यूपी उपचुनाव में पांच सीटों पर अपनी डिमांड रखी थी। इनमें गाजियाबाद, खैर, फूलपुर, मीरापुर और मंझवा शामिल थीं। लेकिन बुधवार को अखिलेश ने 10 में से जिन छह सीटों पर सपा उम्मीदवारों की घोषणा की उसमें फूलपुर और मंझवा भी शामिल हैं। अब कुल चार सीटें ही बची हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गाजियाबाद सदर की सीट सपा, कांग्रेस को दे सकती है। कांग्रेस को चार में से अन्य कौन सीटें दी जा सकती हैं इस पर अभी कोई चर्चा नहीं है। जानकारों का कहना है कि हरियाणा के नतीजों के बाद सपा जरूर चाहेगी कि कांग्रेस यूपी में त्याग करे।कांगेस ने हरियाणा में नहीं दी एक भी सीट
यूपी उपचुनाव में कांग्रेस से त्याग चाहने की सबसे बड़ी वजह यह है कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश या हरियाणा के चुनाव में सपा को एक भी सीट नहीं दी थी। ये दोनों राज्य इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस के प्रभाव वाले थे। हालांकि हरियाणा में चुनाव लड़ने के मंसूबे के साथ समाजवादी पार्टी काफी समय से जुटी थी। पार्टी ने कांग्रेस से पहले 17 फिर 11 सीटों की मांग की थी। अंत में तीन सीटें मांगी लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी। अंत में अखिलेश यादव को कहना पड़ा कि हरियाणा में गठबंधन की जीत के लिए सपा त्याग करेगी। अब अपने प्रभाव वाले सूबे में अखिलेश सीटों को लेकर कड़ा रुख दिखा सकते हैं। कहा जा रहा है कि सपा 10 में से सिर्फ एक सीट देने का प्रस्ताव कांग्रेस के सामने रख सकती है। मंझवा समेत तमाम सीटों पर पार्टी के संभावित उम्मीदवारों ने काफी पहले से प्रचार शुरू कर दिया था।