इंडिया गठबंधन पर नरम दिखे अखिलेश, बोले- कांग्रेस कहेगी कि सपा की जरूरत है तो मना नहीं करेंगे

कांग्रेस और उसके नेताओं पर तेवर दिखाने के बाद आखिरकार सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब नरम पड़ गए हैं। हरदोई में लोक जागरण अभियान के दौरान पहुंचे अखिलेश यादव गठबंधन को लेकर भी हामी भरते नजर आए।

उन्होंने कहा, गठबंधन में कोई गांठ या तल्खी नहीं है। कांग्रेस के पास बड़े नेता के जरिए संदेश पहुंचाया है। यदि वह बुलाएंगे और कहेंगे कि जरूरत है तो सपा गठबंधन के लिए मना नहीं करेगी। पुरानी परंपरा पर जाकर गठबंधन किया जाएगा। अखिलेश ने कहा कि पहले भी सपा ने भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए हमसे गठबंधन नहीं करना चाहती है तो साफ बता दे।

हरदोई में शनिवार को सपा के लोक जागरण अभियान के तहत पूर्व मुख्यमंत्री ने राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में यदि गठबंधन नहीं करना था तो बता देते। इंडिया गठबंधन के वक्त बुलाया और बातचीत की। रात में एक बजे तक हमारे नेताओं को बैठाए रखा। यह गलत किया। यदि हमारी पार्टी के छोटे नेता कुछ बोलेंगे तो रोकूंगा पर दूसरे दल के बड़े नेताओं के बारे में गलत बोलना हमारी परंपरा नहीं है। अखिलेश ने कहा कि यदि कांग्रेस को अभी भी गठबंधन नहीं करना है तो साफ बता दे। हम गठबंधन की बात नहीं करेंगे और यदि उन्हें किसी प्वाइंट पर लगे कि सपा की जरूरत है तो हम साथ देंगे। बस कांग्रेस अपना वादा याद रखे और निभाए।

मध्य प्रदेश में सबसे पहले सपा ने कांग्रेस का साथ दिया था। एक विधायक था जो भाजपा के पास था। उसे पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए बुलाया, समझाया और कांग्रेस के समर्थन में खड़ा कराया। पूर्व सीएम ने कहा कि गठबंधन में स्पष्टता होनी चाहिए। लड़ाई बड़ी है। यदि कन्फ्यूजन में जाएंगे तो भाजपा को नहीं हरा पाएंगे। सपा के अलावा यूपी में भाजपा को कोई नहीं हरा सकता। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ बुजुर्ग नेताओं पर काम का लोड अधिक है, इसलिए वे खिसियाहट में गलत भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। जो गलत होते हैं वे इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं। हम किसी के पिता, मां-बहन के बारे में गलत नहीं बोलते हैं। भगवान से भी प्रार्थना करते हैं कि जब गुस्सा आए तो गलत न बोलूं।

…तो वोट डालने का अधिकार छीन लेगी भाजपा

अखिलेश ने कहा, यूपी के सामने भारी संकट व चुनौती है। 2024 में भाजपा वालों को मौका मिला तो वोट डालने का अधिकार ही छीन लेंगे। संविधान की व्यवस्था खत्म कर देंगे। चुनाव आयोग से लेकर जब सब जगह वे होंगे तो कोई शिकायत भी नहीं सुनेगा।

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