नई दिल्ली – अहमदाबाद से लंदन जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI171 के दर्दनाक हादसे को अब एक महीना बीत चुका है, लेकिन इस त्रासदी की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 जून को महज 30 सेकंड उड़ान भरने के बाद ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 260 में से 259 यात्रियों की जान चली गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसे की एक अहम वजह फ्यूल स्विच का अचानक बंद होना बताई जा रही है।
पायलटों में भ्रम, स्विच खुद कैसे हुआ बंद?
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट में कहा गया है कि टेकऑफ के चंद सेकंड बाद ही दोनों इंजनों में फ्यूल सप्लाई रुक गई। कॉकपिट में रिकॉर्ड हुई बातचीत के मुताबिक एक पायलट ने दूसरे से पूछा, “तुमने कटऑफ क्यों किया?” जवाब आया, “मैंने नहीं किया।” इससे संकेत मिलता है कि यह पायलट की नहीं, बल्कि किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ हो सकता है।
FAA और बोइंग की सफाई पर उठे सवाल
रिपोर्ट आने के बाद बोइंग और अमेरिकी विमानन एजेंसी FAA ने सफाई जारी की और कहा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच पूरी तरह सुरक्षित हैं, उनके डिज़ाइन में कोई खामी नहीं है। FAA ने एयरवर्थनेस डायरेक्टिव जारी न करने का भी फैसला लिया।
लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया पर अमेरिकी सरकार और बोइंग की मिलीभगत की आशंका उठने लगी। कई लोगों ने पूछा कि क्या अमेरिका बोइंग को बचाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हादसे के पीछे संभावित खामी के संकेत साफ हैं।
पहले भी बदला जा चुका है फ्यूल सिस्टम
AAIB ने खुलासा किया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) को 2019 और 2023 में बदला गया था। यही TCM फ्यूल स्विच को कंट्रोल करता है, जो क्रैश के केंद्र में है। 12 जून को टेकऑफ के दौरान अचानक इन स्विचों के कटऑफ मोड में चले जाने से हादसा हुआ।
बोइंग ड्रीमलाइनर की पुरानी तकनीकी खामियां
- बोइंग 787 ड्रीमलाइनर कम्पोजिट कार्बन फाइबर से बना होता है, जो हल्का और मजबूत माना जाता है।
- 2013 में इसकी लिथियम-आयन बैटरियों में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके कारण FAA ने पूरे बेड़े की उड़ानों पर अस्थायी रोक लगाई थी।
- 2020 से 2022 के बीच इसकी बॉडी असेंबली में असमान गैप, झुकाव, और जोड़ों में तकनीकी खामियां पाई गई थीं। FAA ने निगरानी बढ़ाई और कुछ समय के लिए डिलीवरी पर रोक भी लगाई थी।
GEnx और ट्रेंट 1000 इंजनों में भी खराबियां
बोइंग 787-8 में लगे जनरल इलेक्ट्रिक GEnx और रोल्स-रॉयस ट्रेंट 1000 इंजनों में भी कई बार तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत आई। इसके अलावा विंडशील्ड में दरार, फ्यूल लीकेज, और सॉफ्टवेयर फेल्योर जैसी समस्याएं पहले भी दर्ज की जा चुकी हैं।
6000 से ज्यादा हादसे, 9000 से अधिक मौतें
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, बोइंग के 108 साल के इतिहास में अब तक 6000 से ज्यादा प्लेन क्रैश हो चुके हैं, जिनमें 9000 से ज्यादा लोग मारे गए। इनमें कई बड़े हादसे 737 मैक्स और 787 सीरीज से जुड़े रहे हैं।
सीनेट में CEO पर गंभीर आरोप
2023 में बोइंग CEO डेव कॉलहम अमेरिकी सीनेट के सामने पेश हुए, जहां उन पर
- सेफ्टी मानकों की अनदेखी,
- इंजीनियरिंग निरीक्षण में बाधा,
- और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
लेकिन कॉलहम किसी भी सवाल का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
क्या बोइंग को बचा रही है अमेरिका सरकार?
AAIB की रिपोर्ट, FAA की सफाई और बोइंग की बार-बार की तकनीकी विफलताओं के बीच अब सवाल यह उठ रहा है—क्या बोइंग की छवि और अमेरिकी रक्षा/व्यापार हितों की रक्षा के लिए सच को दबाया जा रहा है? क्या मारे गए पायलटों पर दोष मढ़कर सच्चाई को छुपाने की कोशिश की जा रही है?
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण अब जरूरी हो गया है, ताकि सैकड़ों जानें गंवाने वाले यात्रियों और उनके परिवारों को न्याय मिल सके, और भविष्य की उड़ानों को सुरक्षित बनाया जा सके।